सरकारी गेंहूँ के बीज न जमने से किसान हुए बर्बाद
कमलाकर मिश्र की रिपोर्ट लार-देवरिया:-लार क्षेत्र के राजकीय बीज गोदाम से गेहूँ के बीज को खरीदने वालें किसान अब भुखमरी के कगार पर पहुँच गये हैं।इसे विभाग की लापरवाही कहा जाय या अधिकारियों की मिलीभगत की वजह से घटिया बीज ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है,या ये भी हो सकता है कि सरकार को बदनाम करने के लिए कुछ अधिकारियों या विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत हो।जो भी हो अब ये जाँच का विषय हो गया है। तभी इस मामले का दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा।इस भ्रष्टाचार और घोर लापरवाही की वजह से किसानों की जुताई,बुवाई के साथ खाद-पानी का भी पैसा बर्बाद हुआ।अब दुबारा लेट बुवाई होने से उसी नमी पर पुनः बीज जमेगा कि नहीं,ये बहुत बड़ा सवाल है?अखबार में खाद बीज की उपलब्धता की खबर होने के बाद क्षेत्र के सभी किसानों ने गुणवता और शुद्धता की गारंटी के मद्देनजर सरकारी गोदाम से 2967 किस्म का गेहूँ का बीज अपने खेतों में बोया।15 दिन बीत जाने के बाद भी जब गेहूँ नहीं जमा तो किसान उक्त गोदाम पर पहुँचें जहाँ मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।किसानों से प्रार्थना पत्र के साथ उक्त बीज का बोरा पैसा वापस कराने के आश्वासन पर जमा करवाया जा रहा है।अब सवाल ये उठता है कि क्या केवल बीज का पैसा वापस कर देने से किसानों की भरपाई हो जायेगी?उनका खाद-पानी,जुताई-बुवाई,मजदूरी और पुनः इस नमी पर गेहूँ उगेगा या नहीं इसकी गारंटी कौन लेगा?क्षेत्र के किसानों ने ये सरकार से अनुरोध किया है कि बीज के साथ साथ पूरी लागत भी मिले तभी इसकी भरपाई होगी।इस कोरोना काल की आपदा में बाढ़ से नष्ट हुई धान की फसल का भी आज तक मुआवजा नहीं मिला।हरदा रोग ने अलग कहर ढ़ाया।अब ये सरकारी सितम अलग।आखिर किसान करें तो क्या करें,जाय तो कहाँ जाय।इसलिए रामनरेश सिंह,ललिता सिंह,अरविंद सिंह, हरगोविन्द,रोहित यादव,रामायन यादव,अरूण पांडेय,सत्यप्रकाश पांडे इत्यादि किसानों ने सरकार से अविलंब उचित मुआवजे के लिए गुहार लगाई है जिससे पुनः गेहूँ की बुवाई जल्द से जल्द की जा सकें।