सूर्योदय होते ही अर्घ देकर महिलाओ ने पूर्ण किया छठ व्रत
*रिपोर्ट - प्रशांत श्रीवास्तव मेहदावल संत कबीर नगर* मेहदावल - सूर्यदेव के आराधना का महा पर्व छठ श्रृद्धालुओ के द्वारा श्रृद्धा पूर्वक के साथ मनाया गया । सूर्योपासना के यह पर्व डाला छठ के क्रम में शनिवार की सुबह सुख, शांति, संपन्नता तथा पुत्र की मंगल कामना को लेकर निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्यदान कर पूजा पूरी की। इसके लिए फल, फूल और अन्य पूजन सामग्रियों के साथ महिलाएं परंपरागत रूप से गाजे बाजे के साथ अपने घरों से छठ माता के गीत गाते हुए निकलीं। नदी और पोखरों के घाटों पर पूरी तरह मेला जैसा दृश्य नजर आया। घाटो एवं पोखरे पर बच्चों ने जमकर आतिशबाजी की। वही गौरी शंकर मंदिर स्थित पोखरे पर, करमैनी घाट, बेलौहा घाटों पर भीड़ अधिक देखा गया और महिलाओं ने उगते हुए सूर्य को अर्घ्यदान कर अपनी पूजा अर्चना पूरा किया ,वही प्रकृति का छठा अंश होने के कारण इनका नाम षष्‍ठी पड़ा है। षष्‍ठी देवी बालकों की रक्षा’ करती हैं और उन्‍हें दीर्घ जीवन देती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बच्‍चों के जन्‍म के छठे दिन षष्‍ठी पूजा या छठी पूजा होती है। पुराणों में छठी मैया को मां कात्‍यायनी का स्वरूप माना गया है। ऐसी भी मान्यता है कि भगवान सूर्य की बहन छठी मैया हैं। मान्यताओ का माना जाता है की छठी मैया की पूजा करने से लोगों की हर मनोकामनाएं पूर्ण होती है और नियम पूर्वक व्रत करने से परिवार में सुख समृद्धि एवं निसंतान को संतान की प्राप्ति होती है।सूर्य देव की पूजा से सैकड़ों यज्ञ का फल प्राप्त होता है संतानों की सर्व मंगलकामना के लिए भी छठ पूजा और व्रत किया जाता है।