अनुसूचित जनजाति बाहुल्य ग्राम बर्दिया में आयोजित हुई कृषक गोष्ठी
आलोक सिंह ब्यूरो चीफ बहराइच
बहराइच। कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग के नजदीक ग्रामों में मानव-वन्य जीव संघर्ष बाहुल्य (नया शब्द अन्तरापृष्ठ) क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति बाहुल्य ग्राम बर्दिया में राष्ट्रीय कृषि विकास योजनान्तर्गत आयोजित दो दिवसीय कृषक गोष्ठी/मेला को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि विधायक बलहा श्रीमती सरोज सोनकर ने कहा कि ऐसे दूरस्थ क्षेत्रों में गोष्ठी के आयोजन द्वारा उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, बहराइच द्वारा सराहनीय पहल की गयी है। ऐसे आयोजन से जिले के सुदूर क्षेत्रों में निवासरत किसान भी अपनी आय को दोगुना करने के लिए अपनी ओर से बेहतर और कारगर प्रयास कर सकेंगे। मुख्य अतिथि श्रीमती सोनकर ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी व प्रदेश के मा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा देश व प्रदेश के दूरस्थ व अति पिछड़े क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है। जिसके तहत भारत सरकार द्वारा प्रदेश के अति पिछड़े आकांक्षात्मक जनपद के रूप में बहराइच का चयन किया गया है साथ सीमावर्ती अनुसूचित जाति बाहुल्य ग्रामों को विषेष तवज्जो दी जा रही है। श्रीमती सोनकर ने कार्यक्रम के माध्यम से कृषकों का आहवान किया कि किसानी में विविधीकरण को अपनाते हुए उद्यान विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आय को दोगुना करें। सांसद बहराइच अक्षयवर लाल गोंड के प्रतिनिधि संजीव गोेंड ने केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा संचालित विभिन्न विकासपरक व जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान करते हुए कृषकों का आहवान किया कि उद्यान विभाग की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाकर अपनी आय को बढ़ाये। श्री गोंड ने जनपद विशेषकर ऐसे दूरस्थ क्षेत्रों के विकास हेतु सांसद बहराइच द्वारा किये जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। वन क्षेत्राधिकारी कतर्नियाघाट राम कुमार ने किसानों का आहवान किया कि कृषि व उद्यान विभाग के परामर्श से ऐसी फसलों का चयन करें जिसकी ओर वन्य जीव आकर्षित न होते हों। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से मानव वन्य जीव संघर्ष की घटनाओं में कमी आने के साथ-साथ वन्य जीवों के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान भी नहीं होगा। उद्यान विभाग के योजना प्रभारी आर.के. वर्मा ने बताया कि उद्यान विभगा द्वारा राज्य आयुष मिशन, हर्बल गार्डेन के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार की औषधीय फसलो की खेती कराई जा रही है। जिसमें मुख्यतः सतावर एवं लेमनग्रास की खेती बहुतायत से किसानों द्वारा की जा रही है। ब्लाक मिहीपुरवा में गठित कृषक उत्पादन संगठन, मिहींपुरवा नेचुुरल बायो एनर्जी कृषक उत्पादक संगठन द्वारा विगत वर्ष सतावर एवं लेमन ग्रास की खेती उद्यान विभाग के माध्यम से कराई जा रही है। जिसके बहुत ही उत्साहजनक परिणाम आये हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र, नानपारा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. बी.पी. शाही ने बताया कि ग्राम फकीरपुरी, बर्दिया, विशुनापुर में फ्रन्टलाइन प्रजातीय सुधार एवं तकनीकी हस्तान्तरण का कार्य किया जा रहा है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. एस.बी. सिंह द्वारा औषधीय एवं शाकभाजी फसलों के विपणन में आ रही समस्याओं के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की गयी। प्रगतिशील कृषक श्रीमती रंजीत कौर ने कृषकों विशेषकर महिला कृषकों की हौसला अफज़ाई करते हुए कहा कि किसान होना गौरव की बात है। जिन्हे प्रदेश सरकार द्वारा गन्ना उत्पादन में दो बार प्रथम पुरस्कार से सम्मानित प्रगतिशील कृषक स्व. रेशम सिंह की पुत्री होने के नाते मैने एक साफ्टवेयर इंजीनियर होते हुए भी कृषि जैसे चुनौतीपूर्ण व्यवसाय को चुना है। जिस बात मुझे गर्व है। कार्यक्रम के दौरान कृषक शिव शंकर सिंह, राम प्रवेश मौर्या, जगन्नाथ मौर्या, मगन बिहारी पाठक व अन्य द्वारा अपने अनुभव साझा करते हुए प्राकृतिक खेती के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी प्रदान करते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर के लिए स्वस्थ भोजन ज़रूरी है, जिसका उत्पादन प्राकृतिक खेेती से ही संभव है। गोष्ठी में ब्लाक चित्तौरा के ग्राम सोहरवा के प्रगतिशील कृषक लालता प्रसाद द्वारा लगाये गये प्रदर्शनी स्टाल का मुख्य अतिथि ने अवलोकन करते हुए कृषक द्वारा किये गये प्रयासों की सराहना करते हुए दूसरे किसानों से खेती किसानी में श्री प्रसाद का अनुसरण करने की अपील की। गोष्ठी में बड़ी तादाद में कृषक मौजूद रहे। आयोजन को सफल बनाने में प्रगतिशील कृषक अमरेन्द्र कुमार वर्मा, दिनेश सोनकर, मुकेश वर्मा, अनुज यादव, जगन्नाथ चैधरी, राम मिलन पाल, जय प्रकाश मौर्या आदि का सराहनीय योगदान रहा