मानव धर्म शाखा अतरौली का 23 वां वार्षिक सम्मेलन
सदर तहसील कृपा शंकर यादव की रिपोर्ट। गाजीपुर
सदर गाजीपुर क्षेत्र के अतरौली ग्राम सभा में मानव धर्म प्रसार समाज सेवी संस्था का 23 वां वार्षिक सम्मेलन ईश्वर वंदना के साथ प्रारंभ किया गया। गुरु वंदना सुदामा जी ने प्रस्तुत किया। वक्ताओं की कड़ी में निम्न लोग अपने विचार निम्न वत व्यक्त किए। वक्ता सुलोचन जी ने कहां परमात्मा हमें 84 लाख योनियों में सर्वप्रथम बनाया। हम अपने जीवन को व्यर्थ में गंवा रहे हैं। बिना सत्संग किए विवेक नहीं हो सकता और बिना भगवान कृपा के सत्संग में पहुंचना मुश्किल है। इन्होंने कहा हमें सत्य मार्ग पर चलना चाहिए। अहंकार ना हो ना ही हम से किसी मनुष्य को कष्ट पहुंचे। संत ही हमें हर कष्ट से रक्षा करते हैं। वक्ता गोरख जी ने भजन प्रस्तुत किए। इसके बाद इन्होंने कहा की महाराज जी की बातों को ग्रहण करने के बाद उस पर चलने की आवश्यकता है। वक्ता माधव कृष्ण ने कहा आज के दिन को बहुत महत्वपूर्ण बताते हुए कहां मानव धर्म प्रसार सेवी संस्था एक ऐसी संस्था है जो अपने गुरु के आदेश को लेकर आपके बीचआ रहे हैं पैदा करना और मारने का अधिकार भगवान को है। जाति कहां से आई इसे कोई नहीं जानता। भगवान शिव जी ने कहा है कि सतयुग में सभी लोग ब्राह्मण थे। पहले वर्ण व्यवस्था कर्म और गुण पर आधारित थी। जो दान करता है वह छत्रिय है। जो खेती करता है व्यापार करता है। वह वैश्य है। सेवा करने वाले व्यक्ति को शुद्ध कहा जाता है। मनुष्य किसी भी कुल में पैदा हो वह अपने कर्म के अनुसार ही वर्ण निर्धारित होते हैं। इंसान द्वारा बनाए हुए वर्ण व्यवस्था मैं जन्म के हिसाब से होती है इसे मैं नहीं मानता। इसी प्रकार माधव कृष्ण मानव के कृष्ण के लिए अच्छे-अच्छे सुंदर विचारों से सभी मानव धर्म के अनुयायियों को सत्य के मार्ग पर चलने का रास्ता बताएं। इसी प्रकार मानव धर्म के उद्देश्य पर चलने को कहा। सबसे पहले आप मानव बनी, किसी भी जीव जंतु को कष्ट ना दें, सभी को सम्मान पूर्वक देखें, कभी अपने मन में अहंकार ना करे। हमेशा दीन दुखियों की सेवा में लगे रहे। इसी प्रकार अपने अपने विचार से सभी वक्ताओं ने गंगादास राम बाबा के अनुयायियों को प्रस्तुत किए। इस प्रकार से मानव धर्म प्रसार का बाबा गंगा दास जी के आरती के साथ संपन्न किए। सम्मेलन समापन के बाद सभी दूर से आए हुए अनुयायियों और ग्राम सभा के लोगों को अतरौली शाखा के तरफ से बाबा के प्रसाद के रूप में भोजन का भी प्रबंध किया गया। सम्मेलन में शामिल, राजेंद्र जी, वशिष्ठ, मोहन, सोनू, सुनील, कन्हैया, होरीलाल, अरविंद, राम अवध, अवधेश, रमेश, पवन, लोकनाथ, सुदामा, प्रभाकर, मंगल, इत्यादि लोग और ग्रामसभा वासी।