पहले कमीशन फिर जांच का खेल खेल रहे खंड विकास अधिकारी सकरन कहीं जिम्मेदारों का संरक्षण तो नहीं प्राप्त सीतापुर
रिपोर्ट पी एन वर्मा ब्यूरो सीतापुर
जनपद सीतापुर में जहां ईमानदार अधिकारियों की कमी नहीं है वही कुछ भ्रष्टाचार में ऐसे लिप्त हो गए हैं कि उन्हें सिर्फ अपना हित दिखाई दे रहा है और जनता का हित नहीं दिखाई दे रहा हैं। भ्रष्टाचार करने के लिए नित नए तरीके अपना रहे हैं। जिनसे जनता की बड़ी अपेक्षाएं होती हैं। मगर जनता की अपेक्षाओं को अनदेखा कर सिर्फ अपनी अपेक्षाएं पूरी करने पर जुटे हुए हैं। एक तो भ्रष्टाचार चरम पर बढ़ रहा है वहीं अधीनस्थ कर्मचारी परेशान नजर आ रहे हैं। जब सरकार की मंशा के अनुरूप विकास कार्य नहीं होगा तो गांव का समुचित विकास संभव नहीं है। और गांव का समुचित विकास तभी संभव है जब विकासखंड मुख्यालय पर बैठे जिम्मेदार अपनी जेबे भरने के बजाय जनता की समस्याओं को सुनते हुए पात्र व्यक्तियों को उनका लाभ दिलाने का प्रयास करेंगे। मगर अफसोस की बात यह है कि जब विकासखंड मुख्यालय पर बैठे जिम्मेदार ही अपने अधीनस्थों से जांच के नाम पर विकास कार्यों के नाम पर अवैध वसूली पर तुल जाएंगे तो जनता का व ग्राम पंचायतों का विकास कैसे हो पाएगा जो एक बड़ा सवाल है। उत्तर प्रदेश में जब से योगी सरकार आई है लगातार भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्यवाही की गाज गिराते रही है। सरकार की मंशा पर पानी फेरते हुए कुछ अधिकारी अपनी जेब भरने पर तुले हुए हैं जिससे जहां एक तरफ सरकार की छवि धूमिल करने का काम कर रहे हैं वही शासन की मंशा के अनुरूप ग्राम पंचायतों का विकास नहीं हो पा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जनपद सीतापुर के विकासखंड सकरन की बागडोर संभाल रहे खंड विकास अधिकारी अपना एक छत्र राज कायम करना चाहते हैं। जिसमें अधीनस्थों को उनके कहे अनुसार ग्राम पंचायतों का निरीक्षण कर सिर्फ वसूली का खेल खेला जा रहा है। वही आवास में जो पात्र लाभार्थी होते हैं उनको खंड विकास अधिकारी जांच में अपात्र करने का पूरा प्रयास करते हैं और खेल वहीं से शुरू करते हैं जहां से उनकी जेब का वजन बढ़े इसमें पात्र अपात्र भी हो जाते हैं और पात्रों को अपात्र भी कर दिया जाता है। वही दबी जुबान ग्राम प्रधान व सचिव के द्वारा कहा जाता है कि जब से खंड विकास अधिकारी सकरन में आए हैं तब से अपना तानाशाही रवैया अपनाते हुए सिर्फ अपनी जेबों का वजन बनाने का प्रयास कर रहे हैं जिससे उनके अधीनस्थ कर्मचारियों से लेकर आम जनमानस में रोष व्याप्त होता जा रहा है जो कभी भी विकराल रूप ले सकता है। कई ग्राम पंचायतों में जहां खंड विकास अधिकारी के द्वारा निरीक्षण किया गया वहा की जनता से जब स्वतंत्र पत्रकार विजन व पूर्वांचल न्यूज़ पोर्टल की टीम ने गांव में जाकर लोगों से जानकारी करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा कहने को तो जांच करते हैं लेकिन सही को सही ना कह के गलत को सही और सही को गलत करने का कार्य किया जा रहा है। ऐसे में आप अनुमान लगा सकते हैं कि खंड विकास अधिकारी की क्या कार्यशैली है जो वर्तमान में सरकार को बदनाम करने व विकास कार्यों को अवरुद्ध करने का काम कर रहे हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि जनपद में बैठे जिम्मेदारों को जितना ज्यादा चढ़ावा चढ़ता है उतना ही बढ़िया अधिकारी व कर्मचारी माना जाता है। जिसके चलते अपने नंबर बड़वाने के चलते विकास खंड कार्यालय पर बैठे जिम्मेदार कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं जिससे उनको मलाईदार ब्लॉक उपलब्ध रहें। सामुदायिक शौचालय जो ग्राम पंचायतों में निर्माण कराए गए हैं उनमें भी खंड विकास अधिकारी के द्वारा सीधे-सीधे अपनी जेब का वजन बढ़ाने का कार्य किया गया है वही अधीनस्थों को कार्यवाही का डर दिखाकर सच्चाई को छुपाने का कार्य करके और सरकार की महत्वकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन को चूना लगाने का भी कार्य कर रहे हैं। यदि खंड विकास अधिकारी के द्वारा की गई जांचों की उच्च स्तरीय जांच कर ली जाए तो मामला खुद ब खुद सामने होगा। अब देखना यह है कि प्रदेश सरकार की नीतियों को आगे बढ़ाने के बजाय अपनी जेब भरने वालों पर जांच कर कार्यवाही की गाज गिरती है या फिर विकासखंड में क्षेत्रीय जनता को लूटने का काम जारी रहेगा।