सामूहिक विवाह के नाम पर हो रही जमकर लूट, विवाह के सही आंकड़े नहीं दे रहे अधिकारी
सामूहिक विवाह के लिए मिश्रित ब्लॉक में लगाया गया पंडाल
*रिपोर्ट पी एन वर्मा ब्यूरो सीतापुर* सीतापुर-उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही भ्रष्टाचार मुक्त सरकार की बात कर रहे हो लेकिन मिश्रित सीतापुर जिला व मिश्रित तहसील के अधिकारी सीएम के सामूहिक विवाह योजना में जहां बिना लगन के हिंदू रीति रिवाज के के विपरीत शादियां करवाई जा रही हैं वही शादी में नव दंपतियों को दिए जाने वाले सामान से लेकर खान पान से लेकर नव दंपतियों को दी जा रही है सामानो निधि बड़े पैमाने पर कमीशन खोरी और दलाली की गई है,इसके अलावा जिन सीतापुर जिला व तहसील मिश्रिख के अधिकारियों से लेकर मिश्रिख तथा मछरेहटा ब्लॉक के अधिकारियों ने जमकर कमीशन खोरी करके अपनी अपनी जेब भरी गई , सामूहिक विवाह कार्यक्रम संपन्न कराया गया। बिना लग्न और वैवाहिक मुहूर्त के बीते तीन फरवरी को ब्लाक में दो ब्लाकों के संयुक्त संपन्न कराए गए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाहों में किए गए गड़ बड़ घोटाले की परत दर परत खुलकर सामने आ रही है,जिम्मेदार मूक बने हुए है,उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ के भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का दावा पूरी तरह से फेल नजर आ रहा है । क्या दोषियों सामूहिक विवाह में की गई लूट खसोट लिफ्ट भ्रष्ट व रिश्वतखोर अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी या फिर भ्रष्टाचार की बहती नदी डुबकी लगाकर भ्रष्ट अधिकारी मुक्त हो जाएंगे-? विगत 3 फरवरी को सीतापुर जनपद की विकासखंड मिश्रित प्रांगण में 2 ब्लॉकों के तीन फरवरी को प्रदेश सरकार की योजना के तहत सामूहिक विवाह की योजना के तहत मिश्रित ब्लाक प्रांगण में जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा क्षेत्रीय भाजपा विधायक रामकृष्ण भार्गव की उपस्थिति में मिश्रित और मछरेहटा दोनों ब्लाकों के सामूहिक विवाह संपन्न कराये गये । जिसमें ब्लाक के जिम्मेदारों द्वारा जमकर खेल खेले जाने की चर्चाएं आम हो रही है । वहीं मीडिया प्रतिनिधियों को भी गुमराह करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी गई और गलत सामूहिक विवाह के अलग-अलग आंकड़े दिए जा रहे हैं, मिश्रित ब्लाक में अनुसूचित जाति के 33 पिछड़ा वर्ग के 7 और मुस्लिम वर्ग के 6 कुल 46 नव दंपतियों के विवाह संपन्न कराए जाने की सूची मीडिया प्रतिनिधियों को देर सायं आयोजन संपन्न होने के बाद उपलब्ध कराई गयी । लेकिन दूसरे दिन ब्लाक के सहायक विकास अधिकारी समाज कल्याण अमिताभ बर्मा जो ब्लाक के ग्राम इमलिया के निवासी और वर्षों से गृह ब्लाक तैनात है । के द्वारा 45 विवाह ही मिश्रित ब्लाक के संपन्न होने की बात कह रहे है,वही मछरेहटा ब्लाक के विभिन्न गांवों से आए नव दंपति जो सामूहिक विवाह समांरोह के दौरान परिणय सूत्र में बंधे उनकी 35 संख्या की सूची मीडिया को उपलब्ध कराई गयी । लेकिन दूसरे दिन इस ब्लाक में भी 34 विवाह ही संपन्न होने की बात बतायी जा रही है । अब सवाल यह उठता है । कि संपन्न हुए सामूहिक आयोजनों को लेकर मीडिया को नव दंपतियों की भ्रामक सूंची क्यों उपलब्ध कराई गई-? जांच का गंभीर विषय उ है, प्रदेश शासन की योजना के तहत संपन्न हुए सामूहिक विवाहों के नव दंपति के खाते में शासन की ओर से उपहार स्वरूप 35 हजार रुपये भेजे जाने का प्राविधान है । जबकि वर वधू के कपड़े जेवर में चांदी के पायल और बिछिया स्टील के बर्तन बक्सा आदि 10 हजार रुपये में क्रय करके ब्लाक कर्मियों द्वारा दिये गये,उक्त सामान की खरीदारी में भी कमीशन बाजी का खेल खेले जाने की चर्चायें आम हो रही है,यदि शासन और प्रशासन गंभीरता से नव दंपतियों को दिए गए उपहार स्वरूप सामान की जांच करा लें तो सारी कलई खुद व खुद खुलकर सामने आ जाएगी । कितनी कीमत का सामान नव दंपतियों को दिया गया है, और कितना कमीशन खोरो की जेब में गया है । इसी तरह सामूहिक विवाह समांरोह में शामिल नव दंपतियों के परिजनों सहित परिणय सूत्र में बंधे जोड़ों के लिए खाने के पैकेट , पंडाल आदि की व्यवस्था के नाम पर प्रति नव दंपति 6 हजार रुपये का खर्च दिखाया जा रहा है । अब सवाल यह उठता है यदि मान लिया जाए 79 जोड़े ही परिणय सूत्र में बंधे है । तो इन दोनों की तरफ से कार्यक्रम में शामिल होने आए परिजन माता-पिता भाई-बहन दोनों ओर से पांच -पांच की संख्या मान ली जाए तो प्रति दंपति 12 लोग हुए प्रति व्यक्ति दिए गए लंच पैकेट जिसमें चार पूडी , मिक्स सूखी सब्जी , एक हरी मिर्च , मूली के दो टुकड़े और एक बूंदी का लड्डू शामिल है । प्रत्येक पैकेट की कीमत अगर 25 रुपये के हिसाब से जोड़ ली जाए । तो 948 व्यक्तियों को उपलब्ध कराए गए लंच पैकेटो की कीमत 23 हजार 700 रुपये ही होती है । पंडाल और साउंड व्यवस्था पर कितनी धनराशि खर्च हुई होगी अगर यह भी 50 हजार रुपये मान ली जाए । तो यह सारी व्यवस्थाऐं एक लाख रुपये के अंदर ही सिमटती हुई नजर आ रही है, फिर परिणय सूत्र में बंधे 79 जोड़ों में प्रत्येक से की गई 6 हजार रुपये की कटौती 4 लाख 74 हजार रुपये बनती है,यदि खर्च एक लाख रुपये मान लिया जाए तो शेष बचे 3 लाख 74 हजार रुपये किसकी जेब में गए । क्या संबंधित अधिकारी इस बात का जवाब देकर खुलासा करेंगे, यहां पर एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है, आम जन सामान्य के हित में आयोजित किए गए सामूहिक विवाह जैसे महत्वपूर्ण शासकीय कार्यक्रम में गड़ बड़ घोटाला करके कमांई करने वाले कमीशन खोरो की प्रदेश शासन उच्च स्तरीय जांच करेगा-? मुख्यमंत्री द्वारा संचालित सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित कराए गए उपरोक्त सामूहिक विवाह समांरोह में प्रति जोड़ा 51हजार रुपये खर्च करने की व्यवस्था सुनिश्चित कराई गई थी । जिसमें समाज कल्याण विभाग सहित ब्लाक के संबंधित जिम्मेदारों द्वारा जमकर किया गया बंदर बांट लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है । जो भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के दावे को खुले आम मुंह चिढ़ा रहा है ।