प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना से मत्स्य पालक बढा़ सकते है,अपनी आय-डीएम
कमलाकर मिश्न की रिपोर्ट
देवरिया- मत्स्य पालकों की आय वृद्धि के लिये संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना की प्रगति समीक्षा जिलाधिकारी अमित किशोर द्वारा कलक्ट्रेट कक्ष में किया गया। इस दौरान इस योजना को प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन कराये जाने, मत्स्य पालको को अधिक से अधिक जोडे जाने का निर्देश मुख्य मत्स्य कार्यकारी अधिकारी को दिया। कहा कि इस योजना को मत्स्य पालकों के स्तर पर पहुॅचाने के लिये लाभार्थियों एवं मत्स्य समितियों की एक कार्यशाला आयोजित की जाये और उसमें विस्तृत रुप से इस योजना से उन्हे अवगत कराया जाये, जिससे कि इसका वे लाभ उठा सके और मत्स्य पालक अपना आर्थिक उन्नयन कर सके। जिलाधिकारी श्री किशोर ने कहा कि यह योजना मछुआरों एवं मत्स्य पालको की आय को दोगुना करने व रोजगार सृजन करने के लिये काफी अहम है। इससे उन्हे सामाजिक, आर्थिक व जोखिम से सुरक्षा प्रदान भी होगा एवं मजबुत मत्स्य प्रबंधन व नियामक ढांचा तैयार होगा। यह योजना वास्तव में मत्स्य पालकों के लिये बहुत ही उपयोगी व अहम है, इसे अपनाकर मत्स्य उत्पादन का विस्तारिकरण, संघनता एवं विविधिकरण को अपनाकर आय में वृद्धि मुख्य रुप से मत्स्य पालक कर सकेगें। मत्स्य पालकों की क्षमता का सत्त विकास हो और अधिक से अधिक वे आय कर सके, इसके लिये योजना को और सक्रिय किया जाये, मछुआरों एवं मत्स्य पालकों को इस योजना को अपनाने के लिये उन्हे प्रेरित व जागरुक किया जाये। मुख्य विकास अधिकारी शिव शरणप्पा जीएन ने इस योजना की पात्रता के क्रम में बताया कि लाभार्थी को एक प्रमाण पत्र देना होगा कि योजना के लिये किसी अन्य योजना से विभाग से पूर्व में कोई राजकीय सहायता प्राप्त नही हुई है। योजना में केन्द्रीय सहायता प्राप्त करने के लिये लाभार्थी एवं संस्था के पास मानक के अनुसार भूमि उपलब्ध होना आवश्यक है। वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिये परियोजना की भूमि सभी प्रकार से विवाद रहित है, इस आशय का प्रमाण पत्र देना होगा। लाभार्थी व संस्था के पास जल क्षेत्र का पट्टा व वैधानिक अधिकार होना चाहिये। उन्होने यह भी बताया कि आवेदन विभाग के पोर्टल पर आनलाइन करना होगा, जिसके साथ अनिवार्य अभिलेख भी यथा- स्वयं का पासपोर्ट साइज फोटो, आधारकार्ड, बैंक पासबुक, 100 रुपये की स्टैम्प पर शपथ पत्र व भूमि का साक्ष्य खतौनी इत्यादि आवेदन के साथ अपलोड करना अनिवार्य होगा। उप निदेशक मत्स्य ब्रजेश कुमार हलवाई ने इस योजना के लाभार्थियों के विवरण में बताया कि मछुआं, मछली कार्यकर्ता एवं मत्स्य विक्रेता, मत्स्य पालक मात्स्यिकी क्षेत्र के स्वयं सहायता समूह, इस क्षेत्र के संघ, फिश फार्मर प्रोड्यूशर अर्गेनाइजेशन, कम्पनी, राज्य सरकार की कार्यान्वयन संस्थायें, उद्यमी एवं निजी फर्म, अनुसूचित जाति एवं जनजाति, महिला एवं निःशक्त जन आदि इसके लाभार्थी होगें। राजकीय सहायता के मानको का निर्धारण सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को कुल इकाई का 40 प्रतिशत और अनुसूचित जाति एवं जनजाति महिला अभ्यर्थी को इकाई लागत का 60 प्रतिशत अनुदान देय होगी। गतिविधि की शेष धनराशि लाभार्थी को स्वयं वहन करना होगा। लघु एवं सीमान्त मत्स्य पालकों को अधिक से अधिक लाभ प्रदान करने के लिये व्यक्तिगत लाभार्थी अधिकतम दो हेक्टेयर की सीमा तक लाभा प्राप्त कर सकेगें। योजना समूह के माध्यम से यह सीमा 2 हेक्टेयर प्रति के गुणांक में अधिकतम 20 हेक्टेयर की सीमा निर्धारित है। लाभार्थीपरक गतिविधियों के तहत मत्स्य उत्पादन व उत्पादकता में वृद्धि सजावटी एवं मनोरंजनात्मक मात्स्यिकी का विकास, प्रौद्योगिकी से प्रेरणा एवं संयोजन, अवस्थापना एवं उपजोपरान्त प्रबंधन, मत्स्य पालकों एवं मछुआरों की बीमा, मत्स्य संसाधनों के संरक्षण हेतु मछुआरों के लिये आजीविका एवं पोषण से संबंधित सहायता इस योजना के तहत उपलब्ध कराया जाना सम्मिलित है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य नंद किशोर ने बताया कि संचालित इस योजना के क्रियान्वयन के लिये जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक जनपद स्तरीय समिति गठित है, जिसमें मुख्य विकास अधिकारी, पीडी, उपायुक्त मनरेगा, जिला कृषि अधिकारी, अधिशासी अभियंता सिचाई विभाग, एलडीएम, प्रभारी वैज्ञानिक कृषि ज्ञान केन्द्र एवं नामित मत्स्य पालक गंगा शरण श्रीवास्तव सदस्य एवं मुख्य कार्यकारी मत्स्य सदस्य व सचिव नामित हैं।इस बैठक में उपायुक्त मनरेगा गजेन्द्र त्रिपाठी, कृषि वैज्ञानिक सन्तोष चतुर्वेदी, सदस्य गंगा शरण श्रीवास्तव, सहित मत्स्य पालक गण व अन्य संबंधित जुडे जन आदि उपस्थित रहे।