काव्य-रत्नाकर-2021,सम्मान पाकर अभिभूत हूँ- रेनू द्विवेदी
पी एन पाण्डेय की रिपोर्ट
अखिल भारतीय कवितालोक के चतुर्शतकीय महाकुम्भ मे मनोज मानव की पुस्तक - दो आने की चिठ्ठी का भव्य लोकार्पण हुआ जिसमे प्रसिद्ध कवयित्री रेनू द्विवेदी को काव्य रत्नाकर सहित सम्मान पुस्तक "दो आने की चिठ्ठी के साथ साथ साथ ₹25000 का नगद पुरस्कार से उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ में पुरस्कृत किया गया और इन्हें पहले भी इन्हें "भावना के पृष्ठ पर" 2019 एवं "पानी मे भी प्यास" 2020 मे भी सम्मानित की जा चुकी है उन्होने कहा की उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान स्वायत्तशासी संस्था है, विभिन्न योजनाओं के लिए शासन के भाषा-विभाग से प्रतिवर्ष प्राप्त अनुदान से योजनाओं को क्रियान्वित किया जाता है। राजभाषा हिन्दी उत्तर प्रदेश की प्रमुख भाषा तो है ही साथ ही सभी भारतीय भाषाओं से सम्पर्क सूत्र के रूप में भी इसकी अपनी विशेष भूमिका है। यही कारण है कि हिन्दी भाषा के माध्यम से ही भारत की गरिमामयी संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता भारत के बाहर भी प्रसारित एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अभिव्यक्त है। हिन्दी की अनेक बहुमुखी प्रतिभाओं का आविर्भाव एवं कार्यस्थल उत्तर प्रदेश रहा है। इस अवसर पर भव्य लोकार्पण के साथ साथ काव्य -रत्नाकर २०२१ रेनू द्विवेदी को सम्मानित किया गया सम्मान प्राप्त कर उन्होने कहा की काव्य रत्नाकर २०२१ से सम्मानित होना गौरव की बात है और मै इससे बहुत ही अभिभूत हूँ।