बिना गुरु कोई भवसागर पार नही हो सकता- रत्नेश शास्त्री
*रिपोर्ट -प्रशांत श्रीवास्तव संत कबीर नगर*
संत कबीर नगर - संत कबीर नगर के लोहरसन मे चल रहे श्रीमद भागवत महापुराण के चौथे दिन अवध धाम से आए कथा वाचक ने पंडित रत्नेश शास्त्री जी ने लोगो को मनमोहक कथा सुनाया। कथा वाचक शास्त्री महाराज ने कथा के दौरान गुरू के महत्व को बताते हुए कहा कि बिना गुरु के कोई भवसागर से पार नहीं हो सकता ब्रम्हा और शंकर के समान भी कोई ऐश्वर्य साली है तो भी गुरु श्रेष्ठ नही मिला तो परमात्मा नही मिल सकता गुरु तो जीवन मे श्रेष्ठ होना ही चाहिए गुरु तो निर्मल अंत करण वाला मिलना चाहिए। गुरू के महत्व को लेकर मीरा के जीवन मे गुरु के महत्व को बताते हुए कहा कि मीरा ने कभी कालेज का मुख देखा मीरा ने कभी कालेज मे अध्ययन नहीं किया लेकिन मीरा बाई की कविताएं स्नातकोत्तर कक्षाओं में यूनिवर्सिटी के लेवल पर पढ़ाई जाती है मीरा के साहित्य पर लोग पी एचडी करते हैं यह किसकी कृपा केवल गोविंद की कृपा जिस सूरदास ने कभी स्कूल का मुख नहीं देखा उन सूरदास की कविताओं की एक एक लाइन पर लोग पीएचडी करते हैं गोविंद जिस पर कृपा कर दें उसके लिए कोई बात बड़ी है क्या ध्रुवजी के गाल से अपने शंख को प्रभु ने लगाया वेद वेदांत का संपूर्ण ज्ञान ध्रुव के हृदय में आ गया परमात्मा की कृपा का अनुभव करो उसकी कृपा बरस रही है हम उसे कितना ले सकते हैं यह हमारी श्रद्धा के पात्र पर निर्भर है ध्रुव की निष्ठा अद्भुत है क्योंकि ध्रुव का अर्थ होता है निष्ठा ध्रुव का मतलब है अविनाशी ध्रुव का मतलब है दृढ़ निश्चय ध्रुव जी ने प्रभु की स्तुति करनी चाहि लेकिन स्तुति करना आता नहीं तो वह स्तुति करें कैसे परमात्मा श्रीमन नारायण अपने दिव्य शंख को ध्रुव जी के कपोल से लगा दिया जिससे वेद वेदांत ओं का ज्ञान उनके हृदय में प्रस्फुटित हो गया परमात्मा के चरणोमेंधुव्र जी ने स्तुति की