कुडेसर में शिव बारात गाजे- बाजे के साथ पुराना शिव मंदिर से निकली
सदर तहसील कृपा शंकर यादव की रिपोर्ट।
भावरकोल / गाजीपुर। स्थानीय विकास खंड केअंतरगत ग्राम कुडेसर में शिव बारात गाजे- बाजे के साथ पुराना शिव मंदिर से निकली और कबीरपुर मोड़ तक गई और पुनः शिव मंदिर में वापस आई और मंत्रोचार के साथ शिव पार्वती विवाह संपन्न हुआ। सती की विवाह की चर्चा खूब होती रही। इस विवाह की चर्चा हर पुराण में मिलती है। भगवान शंकर ने सबसे पहले सती से विवाह किया था। यह विवाह बड़ी कठिन परिस्थितियों में हुआ था क्योंकि सती के पिता दक्ष इस विवाह के पक्ष में नहीं थे। हालांकि उन्होंने अपने पिता ब्रह्मा के कहने पर सती का विवाह भगवान शंकर से कर दिया। राजा दक्ष द्वारा शंकरजी का अपमान करने के चलते सती माता ने यज्ञ में कूदकर आत्मदाह कर लिया था। इसके बाद शिवजी घोर तपस्या में चले गए। सती ने बाद में हिमवान के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया। उस दौरान तारकासुर का आतंक था। उसका वध शिवजी का पुत्र ही कर सकता था ऐसा उसे वरदान था लेकिन शिवजी तो तपस्या में लीन थे। ऐसे में देवताओं ने शिवजी का विवाह पार्वतीजी से करने के लिए एक योजना बनाई। उसके तहत कामदेव को तपस्या भंग करने के लिए भेजा गया। कामदेव ने तपस्या तो भंग कर दी लेकिन वे खुद भस्म हो गए। इस विवाह में ग्रामीण तो भाग लिए ही थे। कबीरपुर, मादुपुर आदि ग्राम के लोग बढ़ चढ-कर हिसा लिए।