किस किस का प्यास बुझाऊ अकेला जियरा बांसी नगरपालिका माघ मेला का क्या भरोसा एक चाय एक बर्फी एक समोसा
दुर्गेश मूर्तिकार कि रिपोर्ट
सिद्धार्थ नगर बांसी चापलूसी की कथा लंबी होती जा रही है माघ मेला में कहते हैं कि जल ही जीवन है ऐसे में हम आपका ध्यान देते हैं बांसी का विकास माघ मेला खेल के मैदान जो रिजर्व लैड जमीन का दुरुपयोग करते हुए हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भ्रष्टाचार सीमा लांघ चुका है जो जल ही जीवन पर आप सभी का ध्यान कराते हुए कहना है कि पूरा 2021 का मेला समापन के तरफ मुड़ चुका है मगर किसी चापलूस का ध्यान जनता के हित में पीने का पानी पर नहीं जाता है इस के 10 वर्ष पहले रज्जन मिस्त्री से करीब पूरे मेले के प्रांगण में 10 -12 हेड पम्प लगवाया जाता था और अब मात्र कुछ चहेते दुकानदारों को टैंकर से सुबह पानी परोस दिया जाता है वहीं पर रानी मोह भक्त लक्ष्मी स्नान घाट गेट पर एक पम्प दूसरा पुराना शौचालय पर इंडियन हेड पंप लगा है जो कभी कभार बीमार हो जाता है तीसरा नई शौचालय पर हेड पंम्प है मगर यह तीनों हैंडपंप का पानी फ्री से सुगंधित जल देता है जिसको कोई जनता इन पंम्प का पानी पीना पसंद नहीं करती हैं अगर या गलत समाचार है तो ऐसे में नगर पालिका अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी खुद को क्यों नहीं इन हैंड पंम्प का पानी का इस्तेमाल करते हैं यह पानी मात्र शौच के बाद हाथ साफ करने मात्र का है जिसको 2017 में श्रीराम मूर्तिकार ने जल का शौंप्ल लखनऊ से जांच कराने के बाद रिपोर्ट यह नगरपालिका को पानी पीने से मना किया जिस पर जिलाधिकारी कुणाल सिल्कू ने जांच करवाया जिस पर शिकायत सत्य निकला था मगर जैसे ढाक के तीन परत कौन किसका सुनने वाला है मगर लगे रहिए लाइन में कविता पढ़ने के लिए एक चाय एक बर्फी एक समोसा जरूर मिलेगा