सड़कों पर पसरा रहा सन्नाटा
कृपाशंकर यादव की रिपोर्ट। गाजीपुर
गाजीपुर। संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए लगे लाकडाउन के दूसरे दिन रविवार को सड़कों पर सन्नाटा तो पसरा रहा लेकिन बस स्टैंडों एवं निजी वाहनों में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई जाती रहीं। जहां सिटी रेलवे स्टेशन एवं लंका बस स्टैंड के पास दुकानदर चोरी से दुकान खोलकर सामान बेचते दिखे तो वहीं आमजन एवं यात्री महामारी से बेखबर दुकानों पर भीड़ लगाए रहे। नगर के मिश्रबाजार में दुकानदरों एवं आमजन का आवागमन सामान्य दिनों की तरह जारी रहा। लोगों की यह लापरवाही जारी रही तो संक्रमण की चेन टूटने की बजाय और जुड़ती जाएगी जो बड़ा संकट खड़ा कर देगी। 23 अप्रैल की रात नौ बजे से नाइट कर्फ्यू के बाद लोग घरों में कैद हो गए। दो दिनों के वीकेंड लॉकडाउन के मद्देनजर नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में सन्नाटा छा गया। सुबह होते ही नगर के लोग जरूरी काम से बाहर निकले, लेकिन तत्काल काम समाप्त करके अपने घर पहुंच गए। दोपहर होते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। सिर्फ बाहर से आने वाले लोगों की आवाजाही एवं वाहनों की आवाज सड़कों पर सुनाई दे रही थी। नगर के लोग कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए जहां अपने घरों में बंद रहे तो दूसरी तरफ सिटी रेलवे स्टेशन से फुल्लनपुर रेलवे क्रासिंग को जाने वाली सड़क पर इक्का-दुक्का दुकान खोलकर दुकानदार संचालित करते पाए गए। जबकि लंका बस स्टैंड के सामने दुकानदार द्वारा खुलेआम बेल का शर्बत बेचा जा रहा था। नगर के रौजा स्थित मुहम्मदाबाद बस स्टैंड के पास निजी वाहनों में बाहर से आने वाले यात्रियों की भीड़ लगी हुई थी। जबकि आटो एवं अन्य संसाधनों में बैठे यात्री सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते दिखाई पड़े। यही हाल मिश्रबाजार में भी देखने को मिला। वहां के स्थानीय लोग बेधड़क बाजार में घूमते दिखाई पड़े। रौजा तिराहे के पास बने पुलिस पिकेट पर ताला लटका हुआ था। ऐसे में चालक तिराहे के बीचो-बीच वाहन लगाकर यात्रियों को बैठाने का काम कर रहे थे। बिना मास्क के ही ठेला पर खुलेआम सामान भी बेचा जा रहा था। यही नहीं लंका बस स्टैंड पर दो होमगार्डों की ड्यूटी लगाई गई थी, जो पिकेट से नदारद थे और इधर लोग आवागमन करते दिखाई पड़े। मुहम्मदाबाद : वीकेंड लॉकडाउन के दूसरे दिन रविवार को भी नगर में पूर्ण बंदी रही। लोग घरों से बाहर नहीं निकले और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। यूसुफपुर बाजार में दुकानें पूरी तरह से बंद रहीं। सड़कों पर सन्नाटा छाया रहा। लोग घरों के अंदर दुबके रहे। सिर्फ दवा की दुकानें खुली रहीं और उस पर खरीदारों की लंबी कतार दिखाई दी। सड़कों पर इक्का-दुक्का वाहन चलते नजर आए। बहुत से यात्री अपना सामान सिर पर लिए आते-जाते रहे। सड़क पर बेवजह घूमने वाले लोगों से पुलिस कड़ाई से पेश आई। कमोवेश इसी तरह की स्थिति अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी रही। लाकडाउन के दूसरे दिन दुकानें बंद रहने से सड़कें और गलियां दिन भर सूनी रहीं।