पूर्वांचल के गाजीपुर-जौनपुर में गंगा में मिली 140 लाशों को दफनाया, पुलिस ने बढ़ाया पहरा
कृपाशंकर यादव की रिपोर्ट।
पूर्वांचल के गाजीपुर और बलिया में गंगा में मिली लाशों ने सनसनी फैला दी थी। दोनों जिलों में प्रशासन ने शवों का कहीं अंतिम संस्कार करा दिया तो कहीं गड्ढा खोदकर दफना दिया गया है। कोरोना का संक्रमण शहर से लेकर गांव तक पहुंच गया है। स्थानीय लोगों कहना है कि गंगा में लाशें आसपास के गांव से आई होंगी, जो कोरोना से मौत के बाद लकड़ियों का अभाव में दाह संस्कार नहीं कर पाए होंगे। उन्होंने गंगा में बहा दी होंगी। गाजीपुर-बलिया में जहां लाशें मिली है, वहां जिला प्रशासन ने चौकसी बढ़ा दी है। बिहार के बक्सर में गंगा में लाशें मिलने के बाद सोमवार की देर शाम से बलिया और गाजीपुर जिले में गंगा में लाशें मिलने का सिलसिला शुरू हुआ था। इसके बाद से प्रशासन से मंगलवार की देर रात तक लाशों को दफना दिया। गाजीपुर जिले में अंतिम संस्कार को लेकर कई इलाकों से पहुंचने वाले शवों को जलाया जा रहा है। इधर मंगलवार की देर रात तक धरम्मरपुर गंगा घाट के किनारे मिले 123 शवों को दफना दिया गया। गाजीपुर जिले के करंडा थाना क्षेत्र के धरम्मपुर गंगा के किनारे लगे शवों की संख्या अधिक होने खुदाई के लिए मंगलवार दोपहर में पोकलेन बुलानी पड़ी थी। इस दौरान लोगों को उधर जाने से रोक दिया गया था। इसी तरह सेवराई तहसील के नरवा घाट, सोझवा घाट, पंचमुखी घाट और बुलाकिया दास मठिया घाट के शवों को सोमवार देर रात से लेकर सुबह आठ बजे तक दर्जनों कर्मचारियों, ग्रामीणों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से किनारे ही गड्ढा खोदकर दफना दिया गया। इसके बावजूद गंगा के कटान वाले क्षेत्रों में शव दिखाई पड़े। स्थानीय लोग इन शवों को भी दफनाने में जुटे रहे। साथ ही गंगा के तटवर्ती इलाकों में चूना एवं ब्लीचिंग पाउडर का भी छिड़काव कराया गया। डीएम गाजीपुर एमपी सिंह ने कहा कि अपने यहां शव मिलने की कोई संख्या नहीं है। टीम लगाई गई है, जो गंगा घाटों के किनारे सत्यापन करने में जुटी हुई है और शव मिलने पर उन्हें दफनाने का काम कर रही है।