रानीपुर में 2 महिला भाजपा उम्मीदवारों और 1 गैरभाजपाई के बीच उलझी भाजपा
कमलाकर मिश्र की रिपोर्ट मऊ(खरी दुनिया)। विकास खंड रानीपुर में ब्लाकप्रमुख के दावेदारों में एक गैरभाजपाई को जिलाध्यक्ष के द्वारा सर चढ़ाने की राजनीति शुरू हो गई है। दो महिला भाजपाई उम्मीदवारों को छोड़ भाजपा जिलाध्यक्ष ने एक गैॅरभाजपाई को ब्लाकप्रमुख के ओहदे से नवाजने की तैयारी लगभग पुरी कर ली है। जब कि दोनो भाजपाई महिला उम्मीदवार भी हर तरह से चुनावी विगुल मे दखल देने की कूवत रखती है। बताते चले कि भाजपा जिलाध्यक्ष की इसी कारगुजारी के कारण जिलापंचायत सदस्य के 34 उम्मीदवारों में से जीत केवल दो के ही हाथ आ सकी थी। राजनीतिक सूत्रों की माने तो भाजपा जिलाध्यक्ष के द्वारा पदीय अधिकारों की आड़ में ऐसे लोगों को ही ब्लाकों के प्रमुख पदो पर आसीन कराने की योजना को अमली जामा पहनाया जा रहा है जो उन तक एक मजबूत लिफाफा पहुचाने में एड़ी चोटी एक किए एक पैर पर खड़ा है। लिफाफे के खेल में जिलाध्यक्ष के द्वारा ने उम्मीदवारों की समाजिक क्षवि को न तो देखा जा रहा है और न ही उसके राजनीति पार्टी की सदस्यता को। लिफाफा के चक्कर में गैरभाजपाई तक चारा फेेंक रहे जिलाध्यक्ष को नियमतः भाजपाई इद्रावती और उर्मिला पर ही राजनीति करनी चाहिए लेकिन अब तक के खेल में जिलाध्यक्ष का एक गरैभाजपाई पर केंद्रित होकर राजनीतिक पाॅसे बैठाने का काम किया जा रहा है। गैरभाजपाई को एक पूर्व प्रमुख का कभी चालक रहा है। जानकारों का कहना है कि जिलाध्यक्ष के द्वारा यदि लिफाफे को लक्ष्य नही बनाया गया होता तो जिला पंचायत सदस्य से लेकर क्षेत्र पंचायत सदस्यो की जीत में इतनी खराब स्थिति नही होती। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में जिलाध्यक्ष की इसी राजनीति के कारण कई बागियों ने चुनाव लड़कर भाजपाइयों को हराने का काम कर दिया। बहरहाल रानीपुर ब्लाक में ब्लाकप्रमुख के पद पर आसीन कराने के लिए राजनीति दांव खेलने को आतुर जिलाध्यक्ष के द्वारा पूर्व के एक ब्लाक प्रमुख का कभी चालक रहा व्यक्ति ने भी भाजपा जिलाध्यक्ष के द्वारा फेंके गए चारे को निगलने की तैयारी कर ली है। इसके पीछे उसके उपर उसके कभी मालिक रहे पूर्व एक ब्लाकप्रमुख के हाथ होने की दबी जुबाॅन से लगाया जा रहा है आरोप। उधर जब इस मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष से संपर्क कर मामले में जानकारी चाही गई तो उन्होने गैरभाजपाई को ब्लाकप्रमुख बनाने के खेल को खुद के द्वारा खेले जाने से इनकार कर दिया गया है। देखना यह है कि जिलाध्यक्ष के द्वारा दो महिला भाजपाई उम्मीदवारो के बीच से किसी को पाटी्र का उम्मीदवार बनाया जाता है या फिर गैरभाजपाई को। यदि गैरभाजपाई को पार्टी की तरफ से उम्मीदवार बनाया गया तो जिलाध्यक्ष पर लिफाफे की राजनीति भी प्रमाणित होने से नही बचेगी।