कोरोनाकाल में चुनौतियो पर खरें उतरें संजय राय शेरपुरिया*
कृपाशंकर यादव की रिपोर्ट।
गाजीपुर। कोरोना काल में चुनौतियो पर खरें उतरें संजय राय शेरपुरिया। संजय राय शेरपुरिया का नाम आज हर गांव-गांव में सबकी जुबान पर है। क्‍योंकि कोरोना काल के संकट में विपत्तियो ने इस तरह घेर लिया कि अपने प्रियजनो का लोग अंतिम संस्‍कार सम्‍मानजनकपूर्वक नही कर पा रहें थे कि संजय राय शेरपुरिया ने श्‍मशान घाट पर लकड़ी का बैंक खोलकर गरीब-असहाय और कोरोना से पीडि़त लोगो के निधन पर नि:शुल्‍क्‍ लकड़ी उपलब्‍ध कराकर जनपद के लोगो का दिल जीत लिया है। पिछले कई दिनो से गंगा में जलप्रवाह से नदी में कई दर्जन शव उतराये हुए मिलें जिससे प्रदूषण और महामारी का खतरा बढने लगा। प्रशासन ने नागरिको से जलप्रवाह न करने का अपील किया और शव को जलाने का आग्रह किया। ऐसे में गरीब और असहाय लोगो के सामने अपने प्रियजनो के अंतिम संस्‍कार का कठिन प्रश्‍न सामने आ गया, ऐसे में संकटमोचक की भूमिका में संजय राय शेरपुरिया आये और श्‍मशान घाट पर लकड़ी का बैंक खोला जहां पर जरूरतमंद लोगो को नि:शुल्‍क लकड़ी प्रदान की जा रही है। कुछ माह पहले ही संजय राय शेरपुरिया का नाम जनपदवासियो के सामने आया जो जनपद के नौजवानो, बेरोजगारो को आत्‍मनिर्भर बनाने का नारा देकर एक बड़ी संस्‍था का नींव रखा तो जनपद के बुद्धिजीवो में यही चर्चा रही कि बहुत से बड़े लोग संस्‍था बनाकर अपना धंधा पानी चलाते है। इसी बीच कोरोना महामारी का दूसरी लहर आयी और पूरे जनपद को अपने आगोश में ले लिया। बड़ी संख्‍या में लोग बिमार हो गये और मृतको की संख्‍या पिछले वर्ष से कई गुना ज्‍यादे बढ गयी। ऐसे में संजय राय ने अग्नि परीक्षा देते हुए प्रशासन को मेडिकल उपकरण, एम्‍बुलेंस, दवाई आदि उपलब्‍ध कराया और श्‍मशान घाट पर लकड़ी बैंक खोलकर गाजीपुर के लोगो को राहत दी।