बांसी पुलिस के कारनामे सामूहिक बलात्कार को समझौता के कागज मे समेटा
दुर्गेश मूर्तिकार की रिपोर्ट **सरकार के दावों की हवा निकाल रही जनपद पुलिस ** **पुलिस की कार्यशैली यौन जनित अपराधों मे इजाफा करने वाला** सरकार बेटियों को लेकर संवेदनशील तो पुलिस की संवेदनहीनता आया सामने कानून पालने वाले ही उड़ा रहे कानून की धज्जियां सिद्धार्थ नगर केंद्र व प्रदेश सरकार ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे बुलंद करते हुए भले ही हर गली कूचे में लिखवा दें और सामूहिक रूप से लोगों से बुलवा भी ले साथ ही बेटियों की अस्मिता की सुरक्षा के लिए तमाम कानून बनाने और बड़े-बड़े दावे कर ले बावजूद इसके प्रदेश में यौन जनित अपराधों में कमी देखने को नहीं मिल रही है जिसका कारण कहीं ना कहीं कानून का पालना कराने वाले सरकार के ही नुमाइंदे ही एक हद तक जिम्मेदार है जो खुद उस कानून की धज्जियां उड़ाते हैं और आरोपियों पर अंकुश लगाने के बजाय पीड़ित पक्ष को ही प्रताड़ित करते हैं ऐसा ही कुछ मामला जनपद सिद्धार्थनगर के बांसी कोतवाली अंतर्गत देखने को मिला जहां पुलिस द्वारा सारे नियमों की अनदेखी करते हुए रेप पीड़िता को ही हलकान किया जा रहा है मामला विगत 24 अप्रैल का है रेप पीड़िता व उसके मां के अनुसार विगत 24 मार्च को उसकी लड़की गांव में ही शाम को माचिस लेने गई जिस पर गांव के ही 2 लड़कों ने उसको पकड़ लिया और घर में ले जाकर उसके साथ रात भर बलात्कार किया सुबह बेहोशी की हालत में आरोपी के ही दरवाजे पर पीड़िता पड़ी मिली जिस पर उसकी मां ने जोकि बेवा है और अनुसूचित जाति की निहायत ही गरीब है किसी तरह लड़की को उठाकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बांसी लाई जहां प्रथम उपचार के बाद पीड़िता को होश आया तदुपरांत लड़की के मां ने संबंधित थाना कोतवाली बासी में तहरीर देकर शिकायत दर्ज की और उम्मीद लगाया कि शायद उसके साथ न्याय हो सके परंतु जैसे हर काल में गरीब की आवाज नक्कारखाने में तूती बन कर रह जाती है वैसे यहां भी हुआ और पुलिस ने सामूहिक बलात्कार को दूसरी तरफ मोड़ते हुए लीपापोती कर दिया हद तो तब हो गई जब इतने संगीन अपराध मे बांसी पुलिस ने पीड़िता का डाक्टरी मुआयना कराने के बजाय उसके नाम उसका खून जांच करवा लिया पीड़िता के अनुसार उसकी तहरीर को लेते हुए पुलिस ने आला अधिकारियों को सूचित करने के नाम पर उससे एक सहमति पत्र पर अंगूठा लगवा लिया गया और मामले का पटाक्षेप कर दिया गया जबकि पीड़िता को बताया गया कि तुम्हारे मामले को दर्ज कर लिया गया है आगे कार्रवाई होगी ऐसी दशा में पीडिता कुछ दिन इंतजार करने के बाद जब आगे की तरफ रुख किया तो उसे पता चला कि पुलिस ने उसे अंधेरे में रखकर क्योंकि अनपढ़ और गरीब थी इसलिए उसका कोई सहयोगी भी नहीं रहा और उसने दोनों आरोपियों में से एक आरोपी के साथ उसकी नाबालिक लड़की को बालिक होने के उपरांत शादी का समझौता कर दिया अब गौर करने वाली बात यह है कि जिस लड़की के साथ दो लड़कों ने सामूहिक बलात्कार किया हो उसके साथ एक लड़का विवाह कैसे कर सकता है और वह भी जो भविष्य में होना है साथ ही पुलिस के कारनामे निहायत ही मजाकिया जान पड़ते हैं क्योंकि किसी भी दशा में माननीय न्यायालय में नोटरी तक का महत्व नहीं है तो फिर एक सादे कागज पर किए गए समझौते का क्या अस्तित्व है अब ऐसी दशा में सरकार भले ही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और बेटियों की सुरक्षा की गारंटी के नारे बुलंद कर रही हो लेकिन जब कानून के रक्षक ही भक्षक बन कर गरीबों मजलूमो को दबाने में लगे हो तो फिर सरकार के सारे वादे और स्लोगन बेमानी साबित होते हैं मजे की बात तो यह है कि इस मामले में जिले के आला अधिकारी भी कुछ भी कहने से बचते नजर आए और बांसी कोतवाली पुलिस द्वारा किए गए कारनामे को ही सही साबित करने में लगे हुए हैं इस संबंध में कोतवाल शैलेश सिंह कहा कि 2 महीना पहले का मामला है और जैसा यह एप्लीकेशन दे रही हैं उनके अनुसार कल निस्तारण कर दिया जाएगा