प्रतिभा गुप्ता ने सुप्रसिद्ध कवयित्री रेनू द्विवेदी की पुस्तक ,,पानी में भी प्यास ,,की समीक्षा
पी एन पाण्डेय की रिपोर्ट
कृति- पानी में भी प्यास रचनाकार- रेनू द्विवेदी प्रकाशन वर्ष- 2020 मूल्य-225 पानी में भी प्यास (गीतिका संग्रह) रेनू द्विवेदी जी की दूसरी पुस्तक है।जिसमें 65 गीतिकाएँ एवं कुछ सुंदर मुक्तक सुसज्जित हैं।आप एक सफल गृहणी होने के साथ- साथ एक अच्छी कवयित्री हैं,इन सबसे ऊपर एक सरल सहज हृदय की स्वामिनी हैं।आपका यही सरल स्वाभाव आपकी लेखनी में झलकता है।आपने दो - चार विषयों पर नही बल्कि अनेकों विषयों पर गीतिकाएँ रची हैं,जो पूर्ण रूप से छंद्धबद्ध हैं।सबसे खुशी की बात यह है कि आपने अपनी इस पुस्तक को अपनी बेटी आशी द्विवेदी (चारु) को समर्पित किया है।मेरा भी ढेर सारा स्नेह व आशीर्वाद चारु बिटिया को। पानी में भी प्यास एक अनुपम कृति है। इस कृति में आपने जहाँ एक ओर मानवीय मूल्यों के क्षरण पर चिंता व्यक्त करती है तो वहीं दूसरी ओर वेदनाओं की जंजीरों को तोड़कर प्रेम के सागर में गोते लगाती हैं।आपकी गीतिकाओं में भारतीय संस्कृति को फलीभूत करने की आस है तो वहीं पीड़ित,शोषित वर्ग के लिए पानी में भी प्यास है। हर इक गीतिका अपने आप में उत्कृष्ट एवं बेहद सराहनीय है।गीतिका संग्रह से कुछ चुनिंदा युग्म जो मुझे बहुत अच्छे लगे प्रस्तुत हैं- (1) दया भाव से पूरित मन हो,करुणा के संचार से। श्रेष्ठ धर्म मानवता ही हो, यही मुझे वरदान दो। (2) पानी में भी प्यास है,अग्नि हुई ठंडी। प्रश्न बहुत चिंताजनक,कैसे होगा हल। (3) स्वप्न उम्मीद दिल में संजोती नही। प्यार के झील अब क्योंकि मोती नही। (4) पुत्र का व्यवहार कितना भी गलत हो, माँ कभी देती नही है बददुआएँ। (5) निश्वार्थ मन की साधना है गीतिका। ब्रह्मांड की अभिव्यंजना है गीतिका। (6) सुशोभित हुआ ये अयोध्या नगर। मिली राम के आगमन की खबर। (7) सत्य अब बौना हुआ है,झूठ का विस्तार है। स्वार्थ की सीमा नही है,प्रेम में भी खार है। सुंदर व मनभावन गीतिका संग्रह के लिए अपनी परम प्रिय सखी रेनू द्विवेदी को हृदय की गहराइयों से बधाई। आपकी तीसरी पुस्तक खिलखिलाती वेदना शीघ्र प्रकाशित होकर जनमानस तक पहुंचे उसके लिए भी अनंत शुभकामनाएं ।आपकी लेखनी निरंतर चलती रहे यही प्रभु से प्रार्थना है। प्रतिभा गुप्ता आलमबाग,लखनऊ