राज्य कर्मचारियों के मृतक आश्रितों को दी जाए नौकरी और आर्थिक मदद ,दुर्गेश कुमार श्रीवास्तव
कृपाशंकर यादव की रिपोर्ट।
गाजीपुर। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद जिला इकाई की बैठक सोमवार को संरक्षक अरविंद नाथ राय के आवास पर हुई। बैठक में जिलाध्यक्ष दुर्गेश कुमार श्रीवास्तव ने पंचायत चुनाव में कोरोना संक्रमण की वजह से जान गंवाने वाले कर्मचारियों और शिक्षकों को कोरोना योद्धा घोषित करने की मांग किया और श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मृतक कर्मचारियों को सरकार की तरफ से एक करोड़ रुपए की धनराशि उनके परिवार को प्रदान की जाए। तमाम कर्मचारी ऐसे विभागों से थे जिनमें मृतक आश्रित कोटे की व्यवस्था नहीं है। उन विभागों में मृतक आश्रित कोटे को तत्काल बहाल कर उनके आश्रितों की भर्ती की जाए। दुर्गेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि हजारों कर्मचारियों ने अपनी जान पर खेलकर देशहित में जहां पूरी कर्मठता से रात और दिन सेवा दें रहे हैं। इसके बावजूद न तो सभी कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है, न ही उनके आर्थिक भविष्य की सुरक्षा का। अब हर कदम पर शोषण बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद अब सरकार द्वारा मनमाने ढंग से थोपी जा रही नीतियों का विरोध करने के लिए कमर कस रहा है। पंचायत चुनाव के बाद जिले में दो दर्जन से अधिक कर्मचारियों और शिक्षकों की मौत तथा सैकड़ों के संक्रमित होने के बाद भी प्रशासन ने टीकाकरण में उन्हें वरीयता नहीं दी है। ऐसी स्थिति को देख संगठन ने टीकाकरण में सभी कर्मचारियों और शिक्षकों को वरीयता देने की मांग की है। पिछले कोरोना काल से कर्मचारियों को क्वारंटाइन सेंटरों सहित अन्य कोविड कार्यों में लगाया गया। इसके बाद पंचायत चुनाव और मतगणना कार्य में लगाया गया। इसके बावजूद 45 साल से अधिक आयु वाले शिक्षकों को ही टीकाकरण का लाभ दिया जा रहा है, जबकि 45 से कम उम्र वाले कर्मचारियों की संख्या ज्यादा है। हालातों के मद्देनजर अन्य स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग के कर्मचारियों को शत-फीसद टीकाकरण से आच्छादित किया गया, लेकिन कर्मचारियों और शिक्षकों के मामले में अब तक शासनादेश जारी नहीं किया गया। संरक्षक अरविंद नाथ राय ने कहा कि सरकार जब टीकाकरण कराने पर जोर दे रही है तो फिर कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए किसी भी आयु वर्ग की बाध्यता खत्म करते हुए टीकाकरण कराए। जब संक्रमण के हालात में पंचायत चुनाव ड्यूटी की इससे पहले ही टीकाकरण कराया जाता तो ऐसे हालात नहीं होते। बैठक में सरकार द्वारा महंगाई भत्ता सहित अन्य लगभग 15 भत्तों पर कैची चलाए जाने पर अपना विरोध दर्ज किया। वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए इन भत्तों की कटौती के किये चंद नौकरशाहों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। दरअसल भाजपा सरकार कर्मचारियों की किसी भी मांग पर न ही ध्यान दे रही है और नहीं कर्मचारी संगठनो को विश्वास में लेेकर निर्णय कर रही है। कोविड 19 महामारी फैलने के पूर्व में परिवार कल्याण प्रोत्साहन भत्ते सहित छह भत्तों पर रोक कर सरकार पहले ही कर्मचारियों के प्रति अपनी मंशा प्रर्दशित कर चुकी है। अब महामारी की आड में अन्य 6 भत्तों को पहले स्थगित करने के उपरान्त एक सप्ताह के भीतर समाप्ति का निर्णय लिया गया है। बैठक में अरविंद नाथ राय, एसपी गिरी, बालेन्द्र त्रिपाठी, अरविंद कुमार सिंह सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। अध्यक्षता दुर्गेश कुमार श्रीवास्तव व संचालन राकेश पांडेय ने किया।