शेरपुर के मुखिया का चुनाव काफी रोमांचक मुकाबला रहा*
जिला प्रभारी राजीव कुमार पांडेय की रिपोर्ट
भांवरकोल। जिले की बड़ी गांव पंचायतों में शुमार क्षेत़ पंचायत की सबसे बड़ी गांव पंचायत शेरपुर के मुखिया का चुनाव काफी रोमांचक मुकाबला रहा।नेट टू नेट फाइट सेे मतगणना के अन्त तक मुकाबला काफी रोचक रहा।लगभग सात पुरवों में फैली लगभग 23 हजार मतदाताओं वाली इस गा़म पंचायत ने अंन्जली राय को जरूर प़धानी की कुर्सी सौंप दी। लेकिन यहां के गांवीं राजनीति के जानकारों की मानें तो इस पंचायत में लगभग एक ही परिवार एवं खानदान का लगभग तीन दशक तक राजनीति दबदबा कायम रहा है। लेकिन बर्ष 2005 के पंचायत चुनाव के बाद दूसरी बार अंन्जली राय ने घरवाद,पट्टीबाद, जाति एवं बर्गवाद के मिथक को तोड़कर तथा यहां की बर्षों से राजनीतिक परिवारों के दबदबे एवं गोलबंदी को पुरी तरह से ढ़हा दिया। ज्ञात है कि शेरपुर की गंवई राजनीति में सुशीला राय पत्नी अनील काका ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। लेकिन इस चुनाव में जहां अंन्जली राय को 3398 मत प्राप्त किया। वहीं इनके निकट प़तिदंदी आंनन्द राय को 3131 वोट मिला। जबकि बर्षों तक यहां की गांधी सियासत पर मजबूती से पकड़ रखने वाले पूवं प़धान जयप्रकाश राय को लगभग 2400 मतों से ही संन्तोष करना पड़ा। यहां सबसे करारी हार तो इस गांव की दो बार प़धान रहीं निवर्तमान प़धान बिजूला राय के पति लल्लन राय को झेलना पड़ा। जहां उन्हें महज 750 वोटों पर ही संन्तोष करना पड़ा। यहां के रोचक मुकाबले में एक बात तो साफ हो गयी कि अंन्जली के गांव शेरपुर खुर्द के मतदाताओं ने अंजली पर पुरा भरोसा बनाए रखा।अपने गांव से जो अन्य प्रत्याशियों के मुकाबले में लगभग 1800 मतों की बढ़त कायम की जो अन्य तक निकटवर्ती प्रत्याशी आंनंद को कभी भी बढ़त से उबरने का मौका नहीं बनने दिया।यही एक मूल कारण रहा कि आंनंद पिछड़ते गये और अन्त में इस एतिहासिक एवं कांन्तिकारियों के गांव के प्रतिष्ठापरक चुनाव में अन्जली राय के सिर पर जीत का सेहरा बंधा। भांवरकोल। समाजसेवा की तालिम अपने परिजनों से लेकर आगे बढ़ने वाली अंन्जली अब गांव की प्रधान बन गयी है।यह कामयाबी इन्हें पहले प़याश में हासिल की है। बेशक इनके जेठ प्रतिष्ठित चिकित्सक डाo सत्यानंद राय एवं पति जयानंदभी स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत होने के बावजूद इस गांव सभा में काफी पूवं से एक प्रतिष्ठित समाजसेवी के रूप में काफी लोकप्रिय रहे। लेकिन एक ग‌हिणी के रूप में राजनीति से काफी दूर रहीं।खासकर गंवुई राजनीति में बिल्कुल नहीं। लेकिन परिवार के समाजसेवा के बल पर प्रधानी के कांटे के की टक्कर में जीत हासिल कर ली। उन्होंने इस जीत एवं इस पंचायत के जनता के भरोसा पर कहा कि वे जनांकांक्षाओं के अनुरूप बिकास कार्यों को पुरी पार्दर्शिता से कि़याव्यन का हरसंभव कोशिश करूंगी। उन्होंने कहा कि बच्चियों को स्कूली शिक्षा एवं ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए कोई कोर कसर नहीं उठा रखूंगी।