अपनी शर्तो पर जीवन जीते थे दीनानाथ शास्त्री- रामबहादुर राय*
कृपाशंकर यादव की रिपोर्ट।
गाजीपुर। दीनानाथ शास्त्री के जीवन मे कोई उलझन नही थी, वे प्रज्ञा पुत्र थे। अपनी विचारधारा से परे व्यक्तिगत सम्बन्धों को निर्वहन करने की अद्भुत शक्ति के मामले में वे आज के समय मे सबसे अमीर व्यक्ति थे। उक्त बातें पद्मश्री रामबहादुर राय ने दिवंगत दीनानाथ शास्त्री की स्मृति में आयोजित वर्चुअल श्रद्धाजंलि सभा मे कही। गाज़ीपुर जनपद के शेरपुर गांव के रहने वाले दीनानाथ शास्त्री 1942 की अगस्त क्रांति के महानायक अमर शहीद डॉ शिवपूजन राय के इकलौते सुपुत्र और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। 84 वर्ष की उम्र में उनका निधन विगत 18 मई को वाराणसी में हुआ था। 30 मई रविवार को डॉ शिवपूजन राय प्रतिष्ठान , दिल्ली द्वरा दीनानाथ शास्त्री की स्मृति में एक वर्चुअल श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया जिसमें दिल्ली, बनारस समेत पूर्वांचल के कई जनपदों से प्रबुद्ध जनों ने अपने विचार साक्षा करते हुए दिवंगत शास्त्री जी को श्रद्धान्जलि अर्पित किया। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रो ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि शास्त्री जी साहित्य, राजनीति और अध्यात्म के मुहाने पर खड़े नजर आते थे। उनके असमय चले जाने से मौखिक इतिहास का एक बड़ा स्रोत चला गया। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अवधेश राय ने गाज़ीपुर जनपद में सन 1942 की क्रांति पर प्रकाश डालते हुए डॉ शिवपूजन राय समेत अन्य अष्ट शहीदों के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। 18 अगस्त की शहादत के बाद 29 अगस्त को किस कदर अंग्रेजी सेना ने शेरपुर गांव को बर्बरता पूर्वक लूटा और इन धटनाओं को विस्तार से बताते हुए अवधेश राय ने दीनानाथ शास्त्री और उनके परिवार के योगदान को आज़ादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण बताया। श्रद्धाजंलि सभा मे गाज़ीपुर से रामाज्ञा राय, जिनतेंद्र नाथ घोष, वर्धा विश्वविद्यालय से डॉ मनोज राय, प्रयागराज से अधिवक्ता अवधेश राय, वाराणसी से वरिष्ठ पत्रकार अजय राय, रमाशंकर राय , दिल्ली से डॉ गोपालजी राय, राजीवरंजन राय, संजय राय , चंदन राय सूर्यभान राय इत्यादि लोगों ने अपने विचार साक्षा किया। कार्क्रम में धनंजय राय, तुमुल राय , विवेक राय, कल्पनाथ राय समेत कई लोग उपस्थित रहे।