आदि पत्रकार के रूप में जाने-जाते हैं देवर्षि नारद
कमलाकर मिश्न की रिपोर्ट
आदि पत्रकार देवर्षि नारद जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विश्व संवाद केंद्र की तरफ से एक वर्चुअल संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसके मुख्य वक्ता गोरखपुर विश्वविद्यालय इतिहास विभाग के प्रोफेसर हिमांशु चतुर्वेदी रहे। कार्यक्रम को वर्चुअली सम्बोधित करते हुए प्रो0 चतुर्वेदी ने देवर्षि नारद को पत्रकार के रूप में आदि काल से जोड़ा। उन्होने देवर्षि नारद को पत्रकारिता का पितामह बताते हुए कहा कि पत्रकारिता समाज को दिशा देने का कार्य करती है। नारद जी अपनी पत्रकारिता से समाज के हर पहलू आम आदमी से लेकर राजा तक सभी को जोड़े रखते थे।पत्रकारिता का आधार जनसंवाद के मूल्यों पर आधारित होता है जब मूल्यों का ह्रास होगा तब पत्रकारिता का आधार एवं मूल्य का ह्रास होगा। देवर्षि नारद लोक कल्याण जागरूकता एवं प्रजा से राजा तक के बीच सेतु का कार्य करते थे । 19वीं सदी में भारतीय मूल्यों एवं परंपराओं पर बहुत आघात किया गया जिसके कारण पत्रकारिता आज एक बड़ी चुनौती बन उभरी है। इन्हीं कारणों से समाज के लोगों की भी बहुत उम्मीदें टिकी होती है।कार्यक्रम में मुख्य रूप से विभाग प्रचारक अजय नारायण, विभाग प्रचार प्रमुख विनोद, जिला प्रचार प्रमुख पुष्पराज, नगर प्रचार प्रमुख नीरज, नगर विद्यालय प्रमुख मनीष, नगर प्रचारक नागेंद्र, नितिन श्रीवास्तव, विशाल, सत्यम, शिवम, राधारमण, जिला कार्यवाहक दीपेंद्र, मार्कंडेय मिश्रा, मुदित, पुनीत, विवेकानंद समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।