कमोलिया के पूर्व छात्रों ने संभाली मिशन प्रेरणा के प्रेरणा साथी की कमान*
आलोक सिंह ब्यूरो बहराइच
उच्च प्राथमिक विद्यालय कमोलिया खास, चित्तौरा बहराइच कोरोना महामारी के कारण पिछले 2 सालों से बच्चों के लिए विद्यालय भले बंद हों.. लेकिन सरकार और शिक्षकों द्वारा बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने की हर संभव कोशिश की जा रही है.. बेसिक शिक्षा परिषद् के शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से और फ़ोन पर वार्ता करके बच्चों के लिए कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। बहराइच जनपद के चितौरा ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय कमोलिया खास के पूर्व छात्रों संजय , करिश्मा और चंदन ने इस क्रम में एक नजीर पेश की है.. ये बच्चे मिशन प्रेरणा के प्रेरणा साथी बनकर गांव के बच्चों को पढ़ा रहे हैं... विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती अफसाना बेगम ने बताया कि इन बच्चों को व्हाट्सएप के माध्यम से विभाग द्वारा प्रेषित शैक्षिक सामग्री भेजी जाती है .. और इन्हे विद्यालय की ई- पाठशाला से भी जोड़ा गया है शिक्षिका आंचल श्रीवास्तव ने बताया कि विद्यालय के पूर्व छात्रों द्वारा इस जिम्मेदारी का वहन करना इस बात की प्रतिपुष्टि करता है कि निश्चित रूप से इन बच्चों ने इस विद्यालय में पढ़ाई के साथ साथ नैतिक मूल्य भी सीखे हैं.. तभी तो महामारी के इस काल में अपने शिक्षकों के आवाहन पर वे बच्चों को पढ़ाने के लिए सहर्ष तैयार हो गए.. सहायक शिक्षिका अंजना सिंह ने कहा कि इन बच्चों से प्रेरित होकर अन्य बच्चे भी इस अभियान में अवश्य शामिल होंगे... हम सभी प्रयासरत हैं कि अन्य बच्चों को भी इस मिशन से जोड़ा जाए.. शिक्षकों द्वारा व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से तथा फोन कॉल के माध्यम से अभिभावकों और बच्चों से समय-समय पर बात की जाती है.. दूरदर्शन पर प्रसारित शैक्षिक वीडियोस की जानकारी दी जा रही है एवं करोना प्रोटोकॉल तथा वैक्सीनेशन के लिए भी जागरूक किया जा रहा है.. निश्चित रूप से उच्च प्राथमिक विद्यालय कमोलिया खास के बच्चे तथा अध्यापक सबके लिए प्रेरणा स्रोत हैं इनके लिए ये पंक्तियां उचित प्रतीत होती हैं.. *वह पथ क्या पथिक कुशलता क्या*.. *जिस पथ पर बिखरे शूल न हों*.. *नाविक की धैर्य परीक्षा क्या*.. *यदि धाराएं प्रतिकूल ना हों*..