डीएम ने संसाधन विकसित कर कृषि को और नवीनतम तकनीकों से जोडे जाने का दिए निर्देश
कमलाकर मिश्र की रिपोर्ट
देवरिया -कृषि गतिविधियों एवं कृषकों के आर्थिक उन्नयन हेतु संचालित विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन पूरी प्राथमिकता के साथ किए जाए तथा किसान उत्पादन संगठनो के गठन कार्य को भी तेजी से पूर्ण किया जाए एवं अधिक से अधिक कृषकों को इससे जोडा जाए। जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन गूगल मीट के माध्यम से नाबार्ड, कृषि विभाग, कृषि अवसंरचना निधि के जनपद स्तरीय समिति की समीक्षा के दौरान उक्त निर्देश दिए। उन्होने कहा कि एफपीओ का गठन कर कृषकों का आर्थिक विकास किया जा सकता है तथा संसाधन विकसित कर कृषि को और नवीनतम तकनीकों से जोडा जा सकता है। किसानो के आर्थिक उत्थान के लिये इस संगठन की अत्यन्त ही महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए अधिक से अधिक एफपीओ का गठन किया जाए। सभी ब्लाको में अनिवार्य रुप से इसका गठन सुनिश्चित हो। वर्तमान में जनपद में 10 एफपीओ गठित है, जो असंतोषजनक है। जिलाधिकारी ने इसे और बढाए जाने के लिये कृषि विभाग एवं नाबार्ड को निर्देश दिए। उन्होने यह भी कहा कि इस संगठन में अधिक से अधिक किसानो को जोडने के साथ ही इसमें महिलाओं को विशेष रुप से प्राथमिकता दिया जाए।डीडीएम नावार्ड संचित सिंह ने बताया कि कृषि को बढावा देने के लिए भारत सरकार, राज्य सरकार एवं कृषि विपणन स्तर पर तीन समितियां कार्य करती हैं, इस पर जिलाधिकारी ने जनपद स्तर पर गठित इन तीनो समितियों का संयुक्त बैठक एक साथ कराए जाने को कहा। उन्होने कृषि प्रबंधन एवं विपणन को बढावा देने के साथ ही कृषि संसाधनो को और विकसित किए जाने की कार्ययोजना बनाये जाने का निर्देश दिया। उन्होने मशरुम की खेती को मिशन मोड में लिए जाने एवं कृषकों में जागरुकता प्रशिक्षण आयोजित किए जाने हेतु सीडीओ शिव शरणप्पा जी एन से कहा। बैठक में उप कृषि निदेशक डा ए के मिश्र ने बताया कि जनपद में कृषक उत्पादक संगठनों को पांच लाख रू0 के ऋण पर चार फीसदी ब्याज की दर से अनुदान दिया जायेगा। उत्तर प्रदेश सरकार किसान की आय दोगुनी करने के वादे-दावे के साथ तमाम जतन कर रही है। अब इन्हें व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ाने में आर्थिक मदद के लिए पांच लाख रू० का ऋण बैंकों से दिलाने का निर्णय किया गया है, जिस पर चार फीसदी ब्याज सरकार देगी। कृषक उत्पादक संगठनों को पांच लाख रू0 के कर्ज पर ब्याज अनुदान देने सम्बन्धी प्रक्रिया शासन ने निर्धारित कर दी है। इसका शासनादेश अपर मुख्य सचिव, कृषि डा० देवेश चतुर्वेदी की ओर से जारी कर दिया गया है। कृषि विभाग अपने बजट में इसका प्राविधान करेगा। एफ०पी०ओ० का कम्पनी अधिनियम 1956 या उत्तर प्रदेश राज्य सहकारी समिति अधिनियम 1965 के अधीन पंजीकृत होना अनिवार्य है। इनकी सदस्यों की संख्या कम से कम 150 या उससे अधिक होनी चाहिए एवं सभी सदस्यों का निर्धारित अंशदान जमा कराना होगा, जो न्यूनतम 01 लाख होगा।बैठक में सीडीओ शिव शरणप्पा जी एन, उप कृषि निदेशक डा ए के मिश्र, एफपीओ के प्रतिनिधि गण एवं अन्य संबंधित विभागो के अधिकारी एवं पूर्वान्चल पोट्री उत्पादन के वेद व्यास सिंह आदि जुडे रहे।