सिधौना के सिद्धपुरी में विराजै है सिद्धेश्वर महादेव*
सुभाष सिंह यादव की रिपोर्ट।
गाजीपुर:: जनपद मुख्यालय से चालीस किलोमीटर दूर गंगा गोमती नदियों के संगम के करीब वाराणसी सीमा पर सिधौना गांव के सिद्ध भूमि पर बसा सिद्धेश्वर महादेव धाम स्थित है। महान संत पवहारी बाबा के हाथों प्राण प्रतिष्ठा किया गया सिध्देश्वर शिवलिंग आज भी लोगों के मनोकामना पूर्ण करने का मनोरम स्थल बना हुआ है। उन्नीसवीं शताब्दी के परम तपस्वी एवं संत पवहारी बाबा देश भ्रमण के बाद काशी से गंगा मार्ग होते हुए गाजीपुर लौटते समय कैथी स्थित गंगा गोमती के संगम तट पर रात्रि विश्राम करने के लिए रुके थे। रात्रि में देखे गए स्वप्नानुसार भोर में संगम स्नान के समय बाबा को पतित पावनी मां गंगा की गोंद से एक दिव्य शिवलिंग प्राप्त हुआ। जिसे अपने दोनों हाथों में लेकर पवहारी बाबा पश्चिम दिशा में गोमती नदी के किनारे किनारे पैदल ही चल दिये। बाबा को भगवतकृपा से निर्देश प्राप्त हुआ था कि सूर्य की पहली किरण निकलते ही उसी स्थान पर शिवलिंग स्थापित कर दी जाएगी। संगम से कुछ दूर चलते ही जैसे ही सूर्योदय की स्वर्णिम लालिमा की पहली किरण निकली वैसे ही पवहारी बाबा ने सिद्ध स्थान देखकर उस शिवलिंग को वहीं स्थापित कर दिया। कालांतर में वह जगह सिधौना गांव के नाम से प्रसिद्ध हुआ। ऊंचे स्वर्ण शिखर वाले तीन मंजिला मंदिर के पास ही पवहारी बाबा के अनन्य शिष्य स्वामी विवेकानंद जी का आमद कद मूर्ति एवं विवेकानंद पार्क स्थित है जहां प्रतिदिन बुजुर्गों द्वारा योगाभ्यास किया जाता है। मंदिर परिसर में हनुमानजी दुर्गाजी सहित मंदिर प्रांगण में पीपल वृक्ष के करीब पक्का घाट युक्त स्वच्छ सरोवर स्थित है जिसमें छठ पूजन का पर्व आयोजित किया जाता है। सिद्धेश्वर धाम में धार्मिक पुस्तकों के संग्रहालय के साथ भजन कीर्तन रासलीला रामलीला कथा प्रवचन करने के लिए दिव्य मंच बनाये गए है। सावन माह में प्रतिदिन जलार्चन के अलावा प्रति सोमवार को रुद्राभिषेक एवं अन्य पर्वो पर लोगों की भीड़ पूजा-पाठ, रामायण पाठ, शिवश्रृंगार के लिए उमड़ती रहती है। यहां प्रतिदिन दो बार आरती एवं भोग लगाया जाता है।