राष्ट्र नायक नरेन्द्र दामोदर मोदी का उत्तर प्रदेश सरकार के कार्यकाल के अंतिम चरण में आगमन
दुर्गेश मूर्तिकार
जनता के उत्साह का जहां कारण है वहीं उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमा वर्ती सिद्धार्थनगर जनपद के लिये यह परम सौभाग्य की बात- सिद्धार्थनगर - नेपाल सीमा से सटा उत्तर प्रदेश के अति निर्धन उद्योग रहित बहुलक जर्जर और अशिक्षित आर्थिक हालात में बद्तर स्थिति वाले 35 लाख से अधिक आवादी के इस सिद्धार्थनगर जिले में भारत के प्रधानमंत्री का आगमन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के विशेष प्रयासों का नतीजा है और जनता में भी अति उत्साह है, सुरक्षा व्यवस्था पक्षपात पूर्ण न रहे, कहीं कोई कमी न रह जाये इसके लिये उत्तर प्रदेश सरकार ने त्वरित कदम उठाते हुए नये एस0पी0 को सुरक्षा की कमान दे दी गयी है, क्योंकि नेपाल की 84 कि0मी0 की खुली सीमा और पाकिस्तान और तालिबान के बढ़ते आतंकवाद, चीन साम्यवादी राष्ट्र का नेपाल के माध्यम से भारतीय सीमा में घुसपैठ की लगातार कोशिश, जहरीले रसायनों, नकली भारतीय मुद्रा, अफगानिस्तान की प्रमुख समस्या वहां के उत्पाद अफीम जैसे मादक पदार्थो की पाकिस्तान से होते हुए नेपाल के जरिये भारत में उसकी खेप की तस्करी तथा अवैध हथियारो एवं चीन निर्मित अति सस्ते उत्पाद विशेषकर कास्मेटिक्स, वस्त्र और रेडीमेट जाड़े के कपड़े, बैग और अटैची वाटर सप्लाई के लिये इलेक्ट्रिक पम्प, बच्चो के प्लास्टिक खिलौने, मेमोरी चिप्स और कम्प्यूटर हार्डवेयर एवं सस्ती मोबाइल से सम्बन्धित उत्पाद तथा भारत में जहर खुरानी, गिरोहो के लिये घातक रसायन विभिन्न पश्चिमी देशों के माध्यम से नेपाल के जरिये इस जिले द्वारा पूरे भारत वर्ष में पहुंचने की सर्वसुलभ स्थितियां इन सबके बीच यदि भारत देश का प्रधानमंत्री जिले को कुछ देने के लिये अपना आगमन कर रहा है तो जनता को तहे दिल से उसका स्वागत करना चाहिये क्योंकि पूर्ववर्ती सरकारों में पब्लिक में सस्ती लोकप्रियता हासिल करने वाली नीतियों को लागू करने वाली सरकारों ने सिद्धार्थनगर के विकास को कभी तवज्जों नहीं दिया। बसपा सरकार एरोड्रम बनाये जाने का आश्वासन केवल आश्वासन रह गया, नवयुवकों के शिक्षा के लिये जो सिद्धार्थ विश्वविद्यालय का चयन किया गया, वह जनपद के नवयुवकों के लिये न होकर नेपाल राष्ट्र के लिये ज्यादा मुफीद रहा, क्योंकि मुख्यालय से 60 कि0मी0 दूर डुमरियागंज के नवयुवक सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में 120 कि0मी0 नित्य चलकर शिक्षा ग्रहण करने में कत्तई सफल नहीं हो सके, यहां तक कि मुख्यालय से 45 कि0मी0 दूर सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में स्वयं बांसी और जोगिया के नवयुवक जहां नहीं पहुंच सकते वहीं सिद्धार्थ विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों की सुलभ शिक्षा के लिये एक अदद् विश्वविद्यालय सिटी बस तक नहीं चलवाई और समाजवादी पार्टी ने इस विश्वविद्यालय की जो स्थापना कर पुनीत कार्य किया, उसका यहां के नवयुवकों को और छात्राओं को कोई विशेष लाभ नहीं हो पाया, किन्तु भाजपा शासन में बस्ती-सिद्धार्थनगर, ककरहवा, एन0एच0-233 का निर्माण सिद्धार्थनगर के विकास के लिये एक मील का पत्थर साबित हुआ, आज मुख्यालय पर मोदी सरकार द्वारा जो एक अदद् मेडिकल कॉलेज दिया गया, वह सिद्धार्थनगर की जनता के लिये एक अमूल्य सौगात है, यहीं नहीं बिजली और सड़को की व्यवस्था सुधारने में जहां उत्तर प्रदेश सरकार का प्रयास काफी हद तक यहां की बद्तर स्थिति को खुशहाल बनाने लायक कर दिया, फिर भी ग्रामीण सम्पर्क मार्गे अभी भी जर्जर हालात में है, कहते है जहां भ्रष्टाचार है, वहां गंदगी होती है। सिद्धार्थनगर के हर गली, कस्बे गंदगी से पटे पड़े है, देहात की जनता अभी भी चैतन्य न होने के कारण केवल गंदगी के कारण हर गांव से न्यूनतम एक लाख रूपये झोलाछाप डॉक्टर पर व्यय करने को मजबूर है, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थिति बहुत लचर है, किन्तु उत्तर प्रदेश सरकार जो मुख्य रूप से जहां ध्यान देना था वहां ध्यान नहीं दे पायी, और आज सिद्धार्थनगर में जहां एक भी कल कारखाने जिसमें हजार, पांच हजार नवयुवकों को रोजगार मिल सके, उसकी स्थापना नहीं हो सकी, तथा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक राज्यकोष तक नहीं बनाया जा सका जो यहां के नवयुवक और छात्राओं के व्यवसायिक शिक्षा के लिये 10 से 25 लाख तक का सर्वसुलभ ऋण मुहैया करा सके। आज सिद्धार्थनगर के न्यूनतम 25 हजार नवयुवक, युवतियां अपने परिवार के आर्थिक बदहाली के कारण व्यवसायिक शिक्षा नहीं ग्रहण कर पा रहे है, और उनकी ऊर्जा व्यर्थ चली जा रही है। जबकि उत्तर प्रदेश सरकार राष्ट्र नायक की नीतियों का अनुसरण करके यदि भारतीय पुलिस, सेवाकर्मी, ब्यूरोक्रेसी और कर चोरी करने वाले व्यापारियों पर 75 जिलो में पैनी निगाह रखती तो एक लाख करोड़ से अधिक की अवैध सम्पत्तियां, कर चोरी, जी0एस0टी0 चोरी और अधिकारियों के द्वारा संग्रह किये गये अकूत धन यहां तक कि जनप्रतिनिधियों के अकूत धन पर टैक्स लगाकर उस धन को राष्ट्रवादी सरकार द्वारा सिद्धार्थनगर के युवकों के व्यवसायिक, उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु आवश्यक धन ऋण के रूप में देने की व्यवस्था कर सकती थी, किसी भी राज्य की उन्नति तब तक नहीं हो सकती, जब तक कि उस राज्य के करोड़ों नवयुवक जो उच्च व्यवसायिक शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक है, उनको पर्याप्त धन उपलब्ध कराने के लिये कोई राज्यकोष की व्यवस्था न की जाये। आज की स्थिति यह है कि सिद्धार्थनगर के राष्ट्रीय बैंक से आम नवयुवक वर्तमान बैंकिंग कानूनों और नियमों के झंझावात में न तो शिक्षा के लिये ऋण प्राप्त कर पा रहे है, न ही यहां के नवयुवक अपने परिवार की कृषि सम्पत्ति को बंधक रखकर 25 लाख तक ऋण प्राप्त कर सकते है, क्योंकि आर.बी.आई. के नियम कानून और बैंकों के कानून ऐसे बने है, कि उन्हें केवल फसली ऋण मिल सकती है, और आवादी क्षेत्र पूरे सिद्धार्थनगर का राजस्व लेखपालों द्वारा सही कागजात न तैयार किये जाने से उसे बंधक रखकर ऋण नहीं प्राप्त किया जा सकता है, क्योंकि राजस्व विभाग लाखो किसानों को भूस्वामित्त और आबादी के हकों का निपटारा जिला बनने के बाद भी आज 40 साल बीतने को है, नहीं कर सका और योगी सरकार की दुबारा चुनाव में जाने से पहले नवयुवकों की अपने शिक्षा के लिये कोई उम्मीद नहीं बन पायी। उत्तर प्रदेश सरकार का कृषि विभाग एवं सहकारी समितियां घोर भ्रष्टाचार में डूबी है, कृषि मंत्री की उत्तर प्रदेश में निगरानी शून्य है, आज इस जिले के किसानों को गेंहू बीज नकद खरीदने के बावजूद सबसिडी नहीं मिल पायी, क्योंकि राजकीय बीच भण्डार के कर्मचारी उन्हें बीज खरीद की कोई रसीद नहीं दिये और उन्होनें जो कागजात दिये उसकी फीडिंग कृषि विभाग द्वारा न किये जाने से सबसिडी में भारी घोटाला तथा नकली कृषि रसायन और नकली बीजों के आपूर्ति पर कृषि विभाग कोई लगाम भ्रष्टाचार के चलते लगा नहीं पाया, क्योंकि उच्च स्तर पर शायद ही यह कृषि मंत्री को पता हो कि जनपदवार पूरे प्रदेश में उनके कितने राजकीय कृषि बीज भण्डार है, और उनके कर्मचारियों की मनमानी पर और उनके आपूर्ति एवं देनलेन पर कौन ऑडिट और निगरानी कर रहा है। उत्तर प्रदेश की राष्ट्रवादी सरकार राजस्व अधिकारियों और पुलिस की निगरानी के लिये एक खुफिया युनिट तक की उत्तर प्रदेश में नहीं खड़ी कर पायी जिससे कि उसे अपने अधिकारियों और कर्मचारियों तथा जनप्रतिनिधियों के पल-पल की स्थितियों का जानकारी और अनुश्रवण हो सके।