वाल्मिकी रामायण के अनुसार श्रीराम स्वयं धर्म का विग्रह -राघवेंद्र शास्त्री
कमलाकर मिश्र की रिपोर्ट
सलेमपुर नगर के सेंट जेवियर्स रोड स्थित ईचौना वार्ड में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा का रसपान कराते आचार्य राघवेंद्र शास्त्री ने कहा कि वाल्मिकी रामायण के अनुसार श्रीराम स्वयं धर्म का विग्रह हैं। राम आदर्श जीवन जीकर प्रजा तथा संपूर्ण मानव जाति को धर्म का संदेश देना चाहते थे। आज भी जब राम की जप करते हैं तो राजा शब्द से संबोधन होता है। अन्य किसी भी देवी-देवता का संबोधन राजा शब्द से नहीं किया जाता। हृदय परिर्वतन का नाम ही रामराज्य है।जब उन्होंने राम जन्म की कथा सुनाई तो श्रोता भाव विभोर हो गए। उन्होंने कहा कि जब अयोध्या में भगवान राम का जन्म होने वाला था, तब समस्त अयोध्या नगरी में शुभ शकुन होने लगे। भगवान राम का जन्म होने पर अयोध्या नगरी में खुशी का माहौल हो गया। चारों ओर मंगल गान होने लगे। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने भी पृथ्वी लोक पर आकर धर्म की स्थापना की।कथा वाचक राघवेन्द्र शास्त्री ने कथा का वर्णन करते हुए कहा कि राजा बलि बड़े पराक्रमी और दानी थे। भगवान के वे बड़े भक्त भी थे, लेकिन उन्हें बहुत ही घमंड था। तब भगवान के मन में राजा बलि की परीक्षा लेने की सूझी और वामन अवतार लेकर उसके यज्ञ में पहुंच गए। जैसे ही वे राजा बलि के यज्ञ स्थल पर गए, वे उनसे बहुत प्रभावित हुए और भगवान के आकर्षक रूप को देखते हुए उन्हें उचित स्थान दिया। अंत में जब दान की बारी आई तो राजा बलि ने भगवान के वामन अवतार से दान मांगने के लिए कहा, तब उन्होंने राजा बलि से राज्य में तीन पग जमीन मांग ली। राजा बलि मुस्कुराए और बोले तीन पग जमीन तो बहुत छोटा सा दान है। महाराज और कोई बड़ा दान मांग लीजिए, पर भगवान के वामन अवतार ने उनसे तीन पग जमीन ही मांगी। तब राजा बलि ने संकल्प के साथ उन्हें तीन पग जमीन दान में देने की घोषणा की। इसके बाद भगवान दो पग में राजा बलि के पूरे राज्य को नाप दिया, लेकिन तीसरे पग के लिए राजा बलि के पास देने के लिए कुछ भी नहीं था। तब भगवान ने बलि से पूछा कि अपना तीसरा पग कहां रखूं, तब राजा बलि ने महादानी होने का परिचय देते हुए तीसरे पग के सामने अपने आपको समर्पित कर दिया।इस अवसर पर डा0 मोहन पांडेय,अभिषेक जायसवाल,अजय दुबे वत्स,अनूप उपाध्याय, सुधाकर मिश्र,धर्मेंद्र पांडेय,विनोद गुप्ता सहित यजमान त्रिगुणानंद पांडेय कलावती देवी उपस्थित रहे।