साहब इस गरीब पात्र के आवास के लिए कब पड़ेगी नजर
दुर्गेश मूर्तिकार
अपात्रों को पात्र समझ कर खुले दिल से बटा आवास सिद्धार्थ नगर बांसी।ग्राम पंचायतों मे प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी की मनमानी का हद भवाँरी गांव मे दिखलाई पड रहा है।कई ग्रामीण आज पी पक्के आवास के लिए तरस रहे हैं।करीब दो-तीन साल से ग्रामीण प्रधानमंत्री आवास योजना से लाभान्वित होने की आवास मे लगे हैं परंतु सारी उम्मीद धाराशाई है। बरसात के दिनों में छप्पर के जर्जर मकान में जैसे तैसे कष्टदायक जिंदगी गुजर रही है गांव निवासी राजेश पुत्र राम उग्रह,राम दुलारे पुत्र हरीलाल की इनके यहाँ चले जायें तो स्थिति तरस खाने लायक है। राजेश( चिन्कू) अपने दर्जन भर परिवार के साथ बेहद जर्जर छप्पर के घर मे रहते हैं। बरसात के दिनों मे प्लास्टिक की व्यवस्था न करे तो अन्दर रहना मुश्किल हो जाएगा। हर मौसम मे तकलीफो के साथ जीवन गुजर हो रहा है। कारोबार मे ठेला पे खुमचा और फुल्की बेचकर जैसे तैसे गुजर बसर हो जाता है। परन्तु पक्के मकान का निर्माण करा ले यह महज सपना बना हुआ है। पात्र आवेदन भी किये लेकिन अभी तक मयुसी ही हाथ लगी है। यह कहानी राम दुलारे पुत्र हरिलाल की भी है 5 सदस्य परिवार में हैं लेकिन राम दुलारे का लड़का बाहर रहता है तीन लोग गांव पर रहते हैं कच्चे घर पर बरसात में पन्नी तान कर उसी में सभी लोग निवास करते हैं राम दुलारे मजदूरी करके परिवार का जीवन यापन करते हैं लेकिन पक्का मकान नहीं बनवा पाए प्रधानमंत्री आवास योजना का आवेदन भी किए थे मगर अभी तक इन तक नहीं पहुंचा राम दुलारे के लड़के बच्चे बरसात में दूसरे घर में सोने पर मजबूर। आ पात्रों को आवास देने की शिकायत- ग्राम पंचायत भवारी में पात्रों को अनदेखी करके अ पात्रों को आवास देने की पिछले कई दिनों तक चर्चा में आई इंटर नेट मीडिया पर पोस्ट भी डाला गया लेकिन अभी तक कोई अधिकारी जांच करने नहीं आए और आ पात्रों के खाते में पैसा डाल दीया गया है । पात्र का आरोप है की जिसके पास गाड़ी दो ऑटो है और रहने के लायक मकान है उसे आवाज मिल गया और मैं पैर से विकलांग हूं और 4, 5 बेटियां हैं खोमचा फुलकी बेचकर किसी तरह अपनी और अपनी परिवार का जीवन यापन कर रहे हैं। और मेरा नाम आवास लिस्ट में था लेकिन पूर्व प्रधान और सचिव की मिलीभगत से काट दिया गया और मुझे अपात्र घोषित कर दीया गया। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी बासी से पूछना चाहा तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ