हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक मलिक बाबा का वार्षिक पूजन सम्पन्न
कृपाशंकर यादव
गाजीपुर करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र में मुगल काल में अनेको पीर पैगम्बर सूफी संतो के आने का प्रमाण मिलता है जो अपने धर्म के प्रचार प्रसार के लिए भिन्न भिन्न क्षेत्रों में आकर मानव सेवा में लग गये थे। उनका मुख्य कार्य समाजसेवा था। वे जहां भी रहें उनके भोजन पानी की व्यवस्था वहां के लोगों द्वारा की जाती थी। बाद में मुगल काल में उनको उन जगहों का प्रमुख व्यक्ति का दर्जा या रूतबा हासिल हो गया। जैसे की यूसुफ मियां के नाम पर यूसुफपुर, ढोंढा मियां के नाम पर ढोंढाडीह, ताजुद्दीन मियां के नाम पर ताजपुर, करीम मियां के नाम पर करीमुद्दीन पुर इत्यादि। जनश्रुतियों के अनुसार करीम मियां की हत्या कर दी गयी। हत्या के बाद करीम मियां उर्फ मलिक बाबा के नाम से पूरे क्षेत्र में मशहूर जिनका मजार आज भी करीमुद्दीनपुर गांव से सटे पूरब दिशा में है। मलिक बाबा की हत्या के बाद पूरा गाव बना कोपभाजक मलिक बाबा की हत्या के बाद उनका कोपभाजन पूरे गांव को होना पडा। जिससे पूरा गांव डावांडोल रहने लगा। तब जाकर यहां के हिन्दू, मुसलमान दोनों ने मिलकर गांव के बाहर उनका मजार बनवाया और यह तय हुआ कि जब किसी के घर बच्चा जन्म लेगा या विवाह होगा तो मुसलमान रोट और हिन्दू मलीदा का प्रसाद एवम सवा गज, ढाई गज या पांच गज का चादर रक्षाबंधन के दिन जरूर चढायेगा। सर्वसम्मति से हिन्दू मुसलमान दोनों ने यह प्रस्ताव सहर्ष मान लिया। तब से आज तक यह परम्परा के रूप में चली आ रही है। रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर ही मलिक बाबा के मजार को रंग रोगन एवं सजावट कर यहां पर कौव्वाली का आयोजन किया जाता है। रक्षाबंधन के दिन श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को प्रत्येक वर्ष यहां चादर चढाया जाता है। बदले में मलिक बाबा इस गांव को हर आफत बला से बचाते है। आज भी रात्रि में गाव का भ्रमण करते है बाबा लोगों के अनुसार आज भी मध्य रात्रि में मलिक बाबा सफेद वस्त्र में घोडे पर सवार होकर इस गांव का भ्रमण करते है। लोगों के कथनानुसार जब मलिक बाबा रात में निकलते है तो रास्ते में एक अजीब खुशबू महसूस की जाती है। युगो युगो से करीमुद्दीनपुर गांव के चारो तरफ चमत्कारिक दैवीय शक्तियों के विद्यमान रहने का प्रमाण मिलता है। गांव के पूरब दिशा में युगो युगो से मां कष्टहरणी एवम बघउत बरम बाबा, गांव के पश्चिम में बाबा झारखण्डेय महादेव एवम चारमुखी भवानी, गांव से सटे मिश्र बाबा के पोखरे पर बुढवा महादेव, गांव के उत्तर दिशा में नागेश्वर नाथ जी विराजमान है। सभी देवी देवताओं के स्थान के मध्य में करीमुद्दीनपुर स्थित है। समय समय पर अनेको सिद्ध पुरूषों के आगमन एवम चमत्कारों से परिपूर्ण है यह क्षेत्र। आपसी सौहार्द्र एवम गंगा जमुनी तहजीब एवम भाईचारे के प्रतीक है मलिक बाबा। पहले यह मजार कच्चा था जिसको लोगों के सहयोग से भव्य रूप दे दिया गया है।रक्षावंधन के दिन मजार पर स्थानीय लोगों के द्वारा सफाई के साथ साथ सजावट कराया गया था। इस मौके पर ग्राम प्रधान फरीदा परवीन.अनवरी बेगम वार्ड मेम्बर.मोहम्मद अलीम प्रधान पति.मोहम्मद फैयाज प्रधान प्रतिनिधि.मोहम्मद नसरूल्लाह.मोहम्मद तशरीफ.नीतू.अल्ताफ राजा.बंटी समेत ढेर सारे लोग उपस्थित रहे,