विधानसभा चुनाव को लेकर दावेदारों ने बढ़ाई क्षेत्र में अपनी सक्रियता
लखीमपुर खीरी से विमल मिश्रा की रिपोर्ट
*भाजपा से शशांक वर्मा और आशीष मिश्रा "मोनू" टिकट के मुख्य दावेदार वहीं सपा से अभी तक चार नाम आये सामने *ब्लाक प्रमुख के दो चुनावों में किंगमेकर बनकर उभरे विकास अग्रवाल भी लड़ेंगे विधानसभा चुनाव लखीमपुर खीरी।आगामी फरवरी - मार्च माह में संभावित विधानसभा आम चुनाव को लेकर विभिन्न पार्टियों के दावेदारों ने क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।कुछ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी अपनी संभावनाएं तलाश रहे हैं।विभिन्न दावेदार गाँव-गाँव जाकर लोगों से मिल रहे हैं और उनकी कुशलक्षेम पूछ रहे हैं।राजनीतिक पार्टियों की बात की जाए तो समाजवादी पार्टी से अभी तक सबसे ज्यादा दावेदारों के नाम उभरकर सामने आ रहे हैं। प्रदेश में विधानसभा चुनावों की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।मौजूदा सरकार का गठन 17 मार्च 2017 को हुआ था।इस लिहाज से फरवरी से लेकर मार्च के पहले हफ्ते तक सभी चरणों की चुनाव प्रक्रिया हर हाल में पूरी होनी है।यानी कि चुनाव में अब बस छः- सात महीने ही बाकी हैं।ऐसे में सभी दावेदारों ने अभी से अपनी तैयारी शुरू कर दी है।भाजपा की बात करें तो 2017 के चुनाव में पूर्व सहकारिता और लोक निर्माण मंत्री रामकुमार वर्मा को टिकट मिला था और वह विधायक चुने गए थे।लगभग दो साल के बाद उनका आकस्मिक निधन हो गया था और उपचुनाव में उनके पुत्र शशांक वर्मा भाजपा के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए थे।इस बार भी सिटिंग विधायक होने के नाते टिकट के वह दावेदार हैं।लेकिन यहां से सांसद और केंद्र में गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र "टेनी" के बड़े पुत्र आशीष मिश्रा "मोनू" भी टिकट के प्रबल दावेदारों में से हैं।पिछले कई सालों से वह पार्टी में लगातार सक्रिय रहे हैं और क्षेत्र में पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों व बैठकों में भी उनकी प्रभावी उपस्थिति रहती है।खास बात यह कि उनके पिता केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र "टेनी" भी 2012 के चुनाव में इस सीट से विधायक रहे हैं।उधर समाजवादी पार्टी से टिकट के दावेदारों की सबसे ज्यादा संख्या है।2017 के आम चुनाव में कृष्णगोपाल पटेल को सपा का टिकट मिला था।लेकिन उन्हें दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था।हालांकि 2007 के आम चुनाव और 2014 के उपचुनाव में वह दो बार सपा के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए थे।उनके निधन के बाद अब उनके पुत्र हिमांशु पटेल 2021 के विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट के प्रबल दावेदार हैं।वह विधानसभा प्रभारी के रूप में लगातार पार्टी और क्षेत्र में सक्रिय हैं।इसके अलावा पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष अनुराग पटेल,धनीराम मौर्य और अशोक कश्यप भी सपा टिकट के मुख्य दावेदार हैं और क्षेत्र में सक्रिय हैं। बसपा का टिकट 2017 में इंजीनियर जी. एस. सिंह को मिला था।इस बार भी वह टिकट के प्रबल दावेदार हैं।रही बात कांग्रेस की तो 2017 में यहां कांग्रेस का कोई उम्मीदवार चुनाव मैदान में नहीं था क्योंकि तब सपा और कांग्रेस का गठबंधन था और यह सीट सपा के हिस्से में आई थी।पूर्व में दो बार सतीश अजमानी यहां कांग्रेस के टिकट पर विधायक रह चुके हैं।इस समय वह कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय में रहकर पार्टी का कामकाज देखते हैं।वह भी कांग्रेस के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ सकते हैं।शिवपाल सिंह यादव के नेतृत्व वाली प्रगतिशील समाजवादी पार्टी से राजीव गुप्ता मुख्य दावेदार हैं और वह पार्टी के प्रदेश महासचिव भी हैं।वह क्षेत्र में काफी सक्रिय रहते हैं।इधर एक और नाम विधानसभा चुनाव लड़ने वालों में इस समय काफी चर्चा में है।और वह नाम है विकास अग्रवाल का।निघासन में लगातार दो बार राज्य स्तरीय क्रिकेट टूर्नामेंट कराकर युवा वर्ग में वह काफी लोकप्रिय हुए थे और दो बार ब्लाक प्रमुख के चुनाव में अपनी पसंद का उम्मीदवार जितवाकर वह फिर से किंगमेकर के रूप में उभरकर सामने आए हैं।वह पूरी शिद्दत के साथ विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारियों में जुट गए हैं।गांव-गांव लगातार उनके दौरे और जनसंपर्क जारी है।अगर किसी पार्टी से उनकी बात नहीं बनी तो वह निर्दलीय ही मैदान में ताल ठोंक सकते हैं।हालांकि अंदरखाने चर्चा यह भी है कि वह टिकट के लिए बसपा नेताओं के लगातार संपर्क में हैं।कुल मिलाकर इस बार का विधानसभा चुनाव निघासन में काफी रोमांचक होगा।