रक्षाबंधन अर्थात रक्षा का बंधन का त्यौहार श्रद्धा और आस्था*
जिला प्रभारी राजीव कुमार पांडे
य की रिपोर्ट भावरकोल गाजीपुर स्थानीय विकास खंड क्षेत्र में रक्षाबंधन अर्थात रक्षा का बंधन का त्यौहार श्रद्धा और आस्था के साथ बहनों द्वारा भाईयों की कलाईयों पर रक्षासूत्र बांध कर मनाया ग यक्षया।हमारे इतिहास में यह त्योहार जाति धर्म व संप्रदाय से ऊपर उठकर मनाये जाने की घटना देखने को मिलती है। राजस्थानी क्षताणी रानी कर्णावती द्वारा अपने राज्य की शत्रुओं से रक्षार्थ तत्कालीन दिल्ली के बादशाह हूमांयू को अपने दूतों द्वारा राखी भेजकर उसे अपना भाई बनाने और मेवाड़ की रक्षा करने का वचन देने की एक घटना का मार्मिक वर्णन इतिहास में आता है।राखी प्राप्त करते ही हमायू अपनी धर्म की बहन क्षत्राणी कर्णावती की रक्षा करने के लिए विशाल सेना लेकर तुरंत प्रस्थान कर देता है किंतु दिल्ली से मेवाड़ जाने के मार्ग में तमाम बाधाओं का सामना करने में उसे लंबा वक्त लग जाता है और जब पहुंचता है तो पता चलता है कि शत्रु से मुकाबला करने में क्षत्राणी कर्णावती वीरगति को प्राप्त हो गई होती है तब उसे बड़ा कष्ट होता है कि अपने भाई धर्म का निर्वाह नही कर पाया। रक्षाबंधन के और धार्मिक पहलू भी है हिंदुओं के हर त्यौहार के पीछे कोई न कोई धार्मिक कारण भी माना गया है।इस दिन एक दूसरे से काफी दूर रहने पर भी बहने डाक द्वारा भाई के पास राखी अवश्य भेजती है तो कुछ भाई इस दिन बहन के ससुराल जाकर रक्षासूत्र ‌बंधवा कर उसकी रक्षा का मुसीबत में सहयोग करने का वचन देते हैं। लेकिन इस पवित्र के त्योहार मे भी बुराईयां आ गयीहै , उसे दूर करना आवश्यक है। आजकल तो इसे एक मात्र शौक के रूप में देखा जाने लगा है जो इस त्योहार की आत्मा का हनन है। विशुद्ध रूप से यह भाई-बहन है आपसी प्रेम का त्यौहार है जिसमें राखी बंधवा कर बहन अपनी रक्षार्थ भाई से बचन लेती है और भाई देता भी है।देर दोपहर तक राखी बांधने का क्रम चलता रहा और---राखी वंधवा ल भईया सावन ,आईल जीयत रहं मोरे भ ईया लाख वरीस--का पूरे क्षेत्र में गूंजता रहा।