डीएम ने खतौनी दुरुस्ती एवं आनलाइन खसरा तैयार किए जाने की दी जानकारी
कमलाकर मिश्न की रिपोर्ट
देवरिया - जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन विकास भवन गांधी सभागार में प्रेस वार्ता के दौरान खतौनी दुरुस्ती एवं आनलाइन खेसरा तैयार किए जाने के प्राविधानो की जानकारी देते हुए बताया है कि जनसामान्य द्वारा अपने खतौनियों में हुए त्रुटि के सुधार के लिए प्रायः भागदौड की जाती है, इससे निजात के लिए अब यह व्यवस्था बनायी गयी है कि पूर्व के खतौनी से वर्तमान खतौनी में यदि कोई त्रुटि है तो उसका सुधार किए जाने की कार्यवाही की जायेगी, इसके लिए किसी आवेदन या भागदौड की जरुरत नही होगी। लेखपाल स्वयं पूर्व के खतौनी का मिलान करते हुए उस त्रुटि का सुधार किया जायेगा। जिलाधिकारी ने इस दौरान यह भी बताया कि जनसामान्य स्तर से खतौनी दुरुस्ती (संशोधन) की प्राप्त शिकायत में उनकी भूमि पर पूर्व खतौनी में उनका नाम आदि त्रुटिरहित अंकित होने के बावजूद वर्तमान खतौनी में उनका नाम आदि त्रुटिपूर्ण होने एवं इसको दुरुस्त कराये जाने हेतु उनके द्वारा न्यायालय व तहसील आदि का चक्कर लगाये जाने के कारण उनको तमाम कठिनाइयों का सामना करना पडता है। इस प्रकार की शिकायतों एवं समस्या के निराकरण हतु उत्तर प्रदेश भूलेख नियमावली के पैरा क- 155 (3) के अन्तर्गत प्रपत्र क-23 के माध्यम से तथा राजस्व सहिता की धारा 32 व 38 में दी गई व्यवस्था के अनुसार जिलाधिकारी स्तर से यह पारित किया गया है कि क्षेत्रीय राजस्व लेखपाल द्वारा पूर्व की खतौनी एवं वर्तमान की खतौनी का मिलान करके वर्तमान खतौनी में पायी गई त्रुटियों के सम्बन्ध में अपनी आख्या निर्धारित प्रपत्र पर प्रस्तुत की जायेगी। इसके पश्चात् रजिस्ट्रार कानूनगों की आख्या के आधार पर सक्षम अधिकारी तहसीलदार नायब तहसीलदार के स्तर से राजस्व न्यायालय कम्प्यूटरीकरण प्रबन्धन प्रणाली पर वाद जेनरेट (स्थापित) का संशोधन आदेश पारित किया जायेगा तथा आदेश का अंकन वर्तमान खतौनी में कराया जायेगा। ’आन लाइन खसरा तैयार किया जाना’ जिलाधिकारी ने बताया है कि उत्तर प्रदेश भूमि-लेख नियमावली तथा राजस्व संहिता 2006 में दी गई व्यवस्था के अनुसार कुल 21 कालम पर लेखपाल के स्तर से खसरा अभिलेख तैयार किया जाता रहा है। लेखपालों को लैपटाप के साथ डाटा रिचार्ज हेतु प्रतिमाह रू0 251/- की दर से प्रतिपूर्ति का भुगतान किये जाने के फलस्वरूप उक्त खसरे को उनके स्तर से पोर्टल पर आनलाईन तैयार किये जाने के निर्देश दिये जा चुके है। परिषदादेश संख्या-आर-8 / 7/105(खसरा) दिनांक 12.02.2021 द्वारा 21 कालम के खसरे के प्रारूप को संशोधित करते हुए 46 कालम का खसरा प्रारूप (आर०सी० प्रपत्र-4क) निर्गत किया गया है तथा इन 46 कालम की प्रविष्टियों को पोर्टल पर आनलाईन भरे जाने के निर्देश दिये गये है। उपरोक्त क्रम में मेरे स्तर से निर्गत समस्त उपजिलाधिकारी को सम्बोधित पत्र संख्या 393 / सात-भूलेख- 21 दिनांक 11.09.2021 द्वारा यह निर्देश निर्गत किये गये है कि फसली वर्ष 1428 व उसके बाद के खसरो को 46 कॉलम के खसरा प्रपत्र (आर०सी० प्रपत्र 4-क) पर आन लाईन तैयार किया जायेगा तथा इसका रख-रखाव नियमानुसार पी०डी०एफ० अथवा अन्य अपरिवर्तनीय फार्मेट पर सुरक्षित किया जायेगा। इसकी एक मुद्रित प्रति अभिलेखार्थ तहसील स्तर पर भी 12 वर्ष तक संरक्षित की जायेगी। इन कार्यो की साप्ताहिक समीक्षा मुख्य राजस्व अधिकारी द्वारा की जायेगी।