चप्पा-चप्पा खेत पर उपग्रह से वाराणसी के अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान ‘इरी’ की नजर
सुभाष सिंह की रिपोर्ट
वाराणसी । देश के चप्पा-चप्पा खेत पर अब आसमान से नजर रख रहा है वाराणसी स्थित अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी) का दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय केंद्र। इसके लिए संस्थान में सुदूर संवेदन और भौगाेलिक सूचना प्रणाली स्थापित की गई है। इस प्रणाली के माध्यम से लक्षित क्षेत्र के तापमान, वर्षा की संभावना, मौसम की आर्द्रता, मिट्टी की नमी, सूखा व बाढ़ की स्थिति, संभावित रोगों व कीटों के आक्रमण आदि कृषि को प्रभावित करने वाले सभी अवयवों पर सतत दृष्टि तो रखी ही जा रही है, उनके आंकड़े भी एकत्र किए जा रहे हैं। ताकि उनके आधार पर किसी भी क्षेत्र विशेष में फसलों को आने वाली आपदा से बचाया जा सके, जलवायु परिवर्तन की स्थिति को देखते हुए क्षेत्र विशेष की पारिस्थितिकी के अनुकूल फसलों के बीज शोध के द्वारा तैयार किए जा सकें। साथ ही इसके अनुसार नीति बनाने में सरकार व खेती के संबंध में किसानों को परामर्श दिया जा सके।