सर्वपितृ अमवस्या: पितरों को तर्पण करने के लिए श्रद्धालु ने किया पिंडदान
कृपाशंकर यादव
गाजीपुर । सभी गंगा घाटों पर पितरों के तर्पण के लिए तमाम श्रद्धालु पहुंचे। जहां पर अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान कर तर्पण करने का कार्य किया। वहीं जिले के दादरी गंगा घाट पर एक तस्वीर देखने को मिली। जहां पर एक बेटी अपने बुजुर्ग पिता को लेकर गंगा घाट पर पहुंची और पिता के साथ अपने पूर्वजों को तर्पण कराने का कार्य कराया। बता दें कि पितृ पक्ष में सर्वपितृ अमावस्या को आश्विन अमावस्या, बड़मावस और दर्श अमावस्या के साथ महालया भी कहा जाता है। आज के दिन इस दिन ही पितरों की विदाई होती है, इसलिए उनसे किसी भी भूल के लिए क्षमा याचना करते हुए विदा की जाती है। कहा जाता है कि गंगा के किनारे पितरों को तर्पण करने का बड़ा ही महत्व है। कहा जाता है कि कपिल मुनि आश्रम में राजा भगीरथ के परिवार के 60 हजार लोगों को श्राप देकर भष्म किया गया था। जिनके तर्पण के लिए भगीरथ ने गंगा को जमीन पर लाने के लिए तापस्या किया था। जिसके बाद गंगा का अवतरण हुआ और राजा भगीरथ ने अपने पितरों का तर्पण किया था। तभी से ये परंपरा चली आ रही है। इसलिए गंगा के किनारे पितरों का तर्पण ज्यादा फलदायी है। तर्पण में जौव का आटा, खोया, तिल, शहद का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि तिल से भगवान विष्णु और शहद से पितर काफी प्रशन्न होते है।