आंवला नवमी के दिन जो भी शुभ काम किया जाए, उसमें हमेशा पुण्य मिलती है। आज के दिन किए गए कर्म का कभी क्षय नहीं होता,महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनन्दन यति
कृपाशंकर यादव
जखनियां (गाजीपुर)। कार्तिक मास में स्नान का माहात्म्य है, लेकिन नवमी को स्नान करने से अक्षय पुण्य होता है। माना जाता है कि आंवला नवमी के दिन जो भी शुभ काम किया जाए, उसमें हमेशा पुण्य मिलती है। आज के दिन किए गए कर्म का कभी क्षय नहीं होता। उपरोक्त बातें सिद्धपीठ श्री हथियाराम मठ पीठाधीश्वर व जूना अखाड़े के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनन्दन यति जी महाराज ने आंवला पूजन महाप्रसाद अनुष्ठान के अवसर पर शिष्य श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा।अक्षय नवमी को शनिवार को सिद्धपीठ परिसर स्थित वन क्षेत्र में आंवला पूजन के अवसर पर श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहाकि इस दिन विशेष पूजा से अक्षय फल वरदान मिलता है। आंवला नवमी व्रत देव उठनी एकादशी व्रत से दो दिन पूर्व रखा जाता है। आंवला नवमी के दिन आंवला के पेड़ की पूजा करने का विधान है। हिंदू धर्म में आंवला नवमी का विशेष महत्व है। इस दिन अनेक लोग व्रत भी करते हैं और कथा वार्ता में दिन बिताते हैं। उन्होंने बताया कि स्वस्थ रहने की कामना के साथ आंवला के वृक्ष की पूजा की जाती है। आंवला वृक्ष की पूजा के बाद पेड़ के नीचे ही बैठकर ही आंवला प्रसाद का भोजन किया गया। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहाकि ”वय:स्थापन” यह आचार्य चरक कहते हैं. अर्थात सुंदरता को स्तंभित (रोक कर) करने के लिए आंवला अमृत है। बूढ़े को जवान बनाने की क्षमता केवल आंवले में है। संक्षिप्त में आंवला चिर यौवन प्रदाता, ईश्वर का दिया सुंदर प्रसाद है। आंवला एकमात्र वह फल है, जिसे उबालने पर भी विटामिन ‘सी’ जस-का-तस रहता है। च्यवनप्राश में सर्वाधिक आंवले का प्रयोग होता है। आंवले को कम-ज्यादा प्रमाण में खाने से कोई नुकसान नहीं है, फिर थोड़ा-सा शहद डाल कर खाने से अति उत्तम स्वास्थ्य-लाभ होता है। आयुर्वेद में आंवले को त्रिदोषहर कहा गया है। यानी वात, पित्त, कफ इन तीनों को नियंत्रित रखता है आंवला. सिरदर्द, रक्तपित्त, पेचिश, मुखशोथ, श्वेद प्रदर, अपचन जनित ज्वर, वमन, प्रमेह, कामला, पांडु, दृष्टिदोष एवं शीतला जैसे हजारों रोगों में आंवले का उपयोग होता है। आंवला केवल फल नहीं, हजारों वर्ष की आयुर्वेदाचार्यों की मेहनत का अक्षयपुण्य फल है। आंवला धर्म का रूप धारण कर हमारे उत्तम स्वास्थ्य को बनाए रखता है। इस अवसर पर सिद्धपीठ से जुड़े सैकड़ों शिष्य श्रद्धालुओं ने सहभोज में महाप्रसाद ग्रहण किया। जिसमें स्वामी देवरहा बाबा, सन्त अमित त्रिपाठी, कौस्तुभ भट्टाचार्य, आरएसएस जिला प्रचारक कमलेश प्रणामी, अभाविप विभाग संगठन मंत्री रत्नेश जी, आरएसएस विभाग कार्यवाह आनन्द मिश्रा, हलधर सिंह चंदौली, अंकित जायसवाल, योगेंद्र सिंह, डॉ जयप्रकाश जी, श्रवण कुमार त्रिपाठी, अंजनी कुमार, चन्दन पाण्डेय, अंजनी कुमार, डॉ गम्भीर सिंह, अमित सिंह, लौटू प्रसाद इत्यादि उपस्थित रहे।