चारु काव्यांगन साहित्यिक संस्था द्वारा "आँख क्यों हैं नम" ग़ज़ल संग्रह का भव्य लोकार्पण
पी एन पाण्डेय की रिपोर्ट
लखनऊ दिन रविवार को निर्भय नारायण गुप्त 'निर्भय' द्वारा प्रणीत ग़ज़ल संग्रह 'आँख क्यों हैं नम' का भव्य लोकार्पण कार्यक्रम "चारु काव्यांगन" साहित्यिक संस्था द्वारा पूरे हर्षोल्लास के साथ गोमती नगर, लखनऊ में स्थित होटल 'ला गार्डेनिया' में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्य ओम नीरव द्वारा की गई। मुख्य अतिथि अन्तर्राष्ट्रीय गीतकार व शायर के.के.सिंह मयंक तथा विशिष्ट अतिथि कृपाशंकर श्रीवास्तव विश्वास' लखनवी व इस्माइलमैन डॉ सर्वेश अस्थाना रहे। प्रकाशक मोहन मुरारी शर्मा, निदेशक, "निखिल प्रकाशन" आगरा की भी उपस्थिति कार्यक्रम में रही। उन्होंने निर्भय जी को सुन्दर स्मृति चिन्ह व प्रमाण पत्र भी भेंट किया जिसके लिए सभी ने भूरि-भूरि प्रसंशा की गई। कार्यक्रम का सुरुचिपूर्ण संचालन रेनू द्विवेदी, अध्यक्षा 'चारु काव्यांगन' द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राम प्रकाश बेख़ुद ने ग़ज़ल संग्रह का विस्तृत विवेचन किया । कार्यक्रम का आरम्भ इसी ग़ज़ल संग्रह की पहली ग़ज़ल " करें मात अज्ञानता का दहन, नमन शारदे मात सादर नमन " के मधु गुप्त द्वारा गायन के साथ हुआ । तत्पश्चात सुप्रसिद्ध गीतकार डा• सुरेश द्वारा काव्य संग्रह से ही चुनी गई ग़ज़ल का मधुर स्वर में गायन किया गया। इसके बाद ग़ज़ल संग्रह के रचयिता निर्भय जी द्वारा अपनी चुनिन्दा ग़ज़लों को सस्वर पढा गया। अन्त में आभार ज्ञापन डॉ अभिनव गुप्त, शहर के प्रख्यात न्यूरोसर्जन द्वारा किया गया जो निर्भय के सुपुत्र भी हैं। सम्प्रति, कृतिकार निर्भय नारायण गुप्त 'निर्भय' केन्द्रीय भण्डारण निगम से क्षेत्रीय प्रबंधक के पद से वर्ष 2015 में उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के राज्य प्रमुख के रूप में सेवानिवृत्त हुए हैं और उसके पश्चात पूर्णरूप से साहित्य सृजन को समर्पित हैं। उन्होंने इस ग़ज़ल संग्रह में राष्ट्र, परिवार, प्रदेश, श्रृंगार, विरह व राजनीति सहित सभी विषयों पर लेखनी चलाई है जिसकी सभी लोगों ने मुक्त कंठ से सराहना की। इसके पूर्व उनका एक काव्य संग्रह 'प्रीत के पात' वर्ष 2016 में व दूसरा काव्य संग्रह 'काव्य मकरंद' इसी वर्ष में इसके पूर्व आ चुका है। ग़ज़ल संग्रह 'आँख क्यों हैं नम' में उनकी 121 चुनिंन्दा ग़ज़लों को निखिल प्रकाशन आगरा के माध्यम से प्रकाशित किया गया है। यह ग़ज़ल संग्रह रचनाकार ने अपनी जीवनसाथी को समर्पित किया व लोकार्पण कार्यक्रम को अपनी वैवाहिक वर्षगांठ के अवसर रखा है। यह काव्य संग्रह अमेजन पर भी आन लाइन उपलब्ध है। लखनऊ के अनेक विशिष्ट, गणमान्य व प्रख्यात साहित्यकारों की उपस्थिति में ग़ज़ल संग्रह 'आँख क्यों हैं नम" का भव्य लोकार्पण सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का आरम्भ अध्यक्ष आचार्य ओम नीरव के उद् बोधन के साथ हुआ। विशेष उपस्थिति उमेश चन्द्र दुबे, अध्यक्ष आदर्श साहित्य परिषद, नरेंद्र भूषण, अध्यक्ष सुन्दरम साहित्य परिषद, डा• शिव मंगल सिंह 'मंगल', डा• शैलेन्द्र राजन , निदेशक, केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा, हरिश्चन्द्र निशान्त, अध्यक्ष प्रज्ञा साहित्य परिषद, ज्ञान प्रकाश ज्ञान, हरि मोहन बाजपेई, अध्यक्ष काव्य क्षेत्रे साहित्यिक संस्था, डा• महेश अस्थाना प्रकाश, अध्यक्ष नवोदय साहित्यिक एवम सांस्कृतिक संस्था, डा• कुल दीप नारायण सक्सैना, वीरेंद्र सक्सैना, विनोद शंकर शुक्ल, अध्यक्ष, स्पन्दन साहित्यिक संस्था, योगी योगेश शुक्ल, विजय त्रिपाठी, सियाराम तिवारी , डा• कमलेश नारायण श्रीवास्तव 'सरस', सरवर लखनवी, संजीव श्रीवास्तव, हरिनाथ सिंह, प्रधान सम्पादक ' राष्ट्रीय प्रस्तावना', राजीव वर्मा वत्सल, पंकज सिंह राहिब मैत्रेय, शरद कुमार पाण्डेय शशांक, डा• सुभाष रसिया, प्रतिभा गुप्ता, वर्षा श्रीवास्तव, डा• अनन्ता गुप्त, मधु दीक्षित, सरला शर्मा, सरोज बाला सोनी, शालिनी, मृत्युंजय कुमार गुप्त, सम्पादक, 'विश्व विधायक', रमा शंकर सिंह, शरद पाण्डेय 'शशांक', रमेश चंद्र ' रचश्री', विनोद कुमार द्विवेदी, डा• अभिषेक सिंह, डा• योगेश सिंह, सोहित अवस्थी, अनमोल विश्वकर्मा भाष्कर , केंद्रीय भंडारण निगम के लखनऊ के वर्तमान क्षेत्रीय प्रबंधक राम कुमार, विनय कुमार मिश्रा, जय श्री अग्रवाल, अजीत सक्सैना, उदय शंकर श्रीवास्तव, अचल अग्निहोत्री आदि ने अपनी शुभकामनाओं व उपस्थिति से कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।