कार्तिक पूर्णिमा में श्रद्धालुओं ने लगाया गंगा में डुबकी
जयंत यादव
गाज़ीपुर । भांवरकोल कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर क्षेत्र के विभिन्न गंगा घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं ने पतित पावनी मोक्षदायिनी मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर मोक्ष की कामना की। शुक्रवार की अल सुबह 4 बजे से स्नान उपरान्त दान पुण्य कर श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। और शाम को दीपदान शुरू हुआ ।देव दीपावली शाम को घरों में दीपमालएं कर भगवान विष्णु का आवाहन भी किया गया इस दिन भगवान विष्णु ने अपने पहले अवतार यानी मत्स्य रूप धारण किया था। वहीं महादेव ने आज ही के दिन त्रिपुरासुर नाम के असुर का वध किया था जिसे ब्रह्मा जी का वरदान मिला था। त्रिपुरासुर के वध के बाद महादेव को त्रिपुरारी के नाम से पुकारा जाने लगा। इस दिन गंगा स्नान का महत्व है। पवित्र गंगा में भी स्नान कर दीपदान किया गया। इस दिन क्षीरसागर दान भी किया जाता है, जिसमें बर्तन में 24 उंगल ऊंचाई तक दूध भरकर उसमें सोने या चांदी की मछली डाल पर उसका दान किया जाता है। देव उठनी एकादशी के बाद से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक देवताओं ने 5 दिन का उत्सव मनाया था। देवउठनी एकादशी के दिन क्षीरसागर में भगवान विष्णु लंबी निद्रा के बाद जागे थे और पूर्णिमा के दिन वह देवलोक पहुंचे है जहां उनके आगमन पर सभी देबी- देवताओं ने दीपमाला जलाकर उनका स्वागत किया था ।इसलिए कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली भी कहा जाता है ।इस पूर्णिमा को सबसे बड़ी पूर्णिमा माना जाता है इसमें तीर्थ स्नान का बड़ा महत्व है पवित्र नदियों में इस दिन स्नान करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है। गंगा स्नान के चलते क्षेत्र के शेरपुर, सेमरा, बीरपुर,पलियां आदि गंगा घाटों पर सुबह देर तक स्नानार्थियों का तांता लगा रहा।